लो प्रेशर एरिया के कारण हो सकती है बूंदाबांदी

Aug 11 2020

ग्वालियर। शहरवासियों की भरपूर बरसात की आस एक बार फिर अधूरी रह गई। यदि मौसम विभाग की माने तो बीते कुछ दिनों से शहर में बना सिस्टम अब आगे सरक गया है और आने वाले तीन दिन तक कोई नया सिस्टम है भी नहीं। अब जो बादल मंडरा रहे हैं, या फिर टुकड़ों में बरस रहे हैं यह क्रम जारी रहेगा, क्योंकि उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, झमाझम बरसात की फिलहाल कोई संभावना नहीं है। यानि एक बार फिर गर्मी और उमस का सामना करना पड़ेगा। अरब सागर से आने वाली नमी वातावरण में घुल रही है, जिससे आद्र्रता में बढ़ोतरी बराबर बनी हुई है।
यही उमस का सबब भी है। बादल छाए हैं, पर बरसात गायब मंगलवार को भी सुबह से आसमान पर छाए घने काले बादल आस तो खूब बंधा रहे थे, लोग आशान्वित भी थे, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल कोई सिस्टम शहर में सक्रिय नहीं है, एक सिस्टम था जो हालात विपरीत बने रहने के कारण छुटपुट बरसात कराकर निकल लिया। ऐसे में आज फिर बादलों की यह टुकड़ा गैंग शहर में तेज बौछार जरूर कर सकती है, लेकिन जोरदार बरसात इसके बूते से बाहर है। हालांकि शीतल हवा और बादलों ने
मौसम को सुहावना जरूर बना दिया है, जिससे गर्मी से तो फिलहाल राहत है।
तिघरा में बढ़ा सवा फुट पानी
शहर की जल आपूर्ति के मु य स्त्रोत तिघरा जलाशय की स्थिति भी कुछ कास ठीक नहीं है। भले ही इसमें कुछ पानी आने से इसकी वाटर लेबल बीते 24 घंटे में सवा फुट बढ़ गया है। पिछले सात दिन से यह लगातार 7&1 फुट पर टिका था अब 732.4 फुट मंगलवार सुबह नापा गया।
सब इंजीनियर तिघरा संतोष तिवारी का कहना है कि कैचमेंट एरिया में हुई बरात के कारण यह जल बढ़ोतरी हुई है। अभी और भी इजाफा हो  सकता है, लेकिन , काफी पानी की दरकार है।
फसलों पर भी असर
शहर में तो जहां लोग पानी न गिरने को लेकर निराश हैं, लेकिन ग्रामीण अंचलों में तो हर दिन के साथ किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. रामसिंह कुशवाह का कहना है कि इस बार धान की फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। जिन किसानों ने सिंचाई के कृत्रिम साधनों से बुआई कर भी दी थी, उन्हें भी अब पानी की जरूरत है। 
मौसम विभाग का कहना
फिलहाल कोई सिस्टम नहीं है, ऐसे में दो से तीन दिन और बरसात का इंतजार करना पड़ेगा। इसके बाद बंगाल की खाड़ी में ही एक नया सिस्टम तैयार हो रहा है, जो यहां पहुंचेगा यदि सब ठीक रहा तो अच्छी बरसात हो सकती है। वहीं राजस्थान के ऊपर मंडरा रहा एक सिस्टम भी ग्वालियर के लिए डायवर्ट हो सकता है।