जिंदगी को तीर्थ बनाकर जीना चाहिए तमाशा बना कर नहीं-मुनिश्री

Aug 06 2020

ग्वालियर। जिंदगी को तीर्थ बनाकर जीना चाहिए तमाशा बना कर नहीं जो लोग जिंदगी को तमाशा बना कर जीते हैं उनकी जिंदगी उनके लिए मातम बन जाती है। महोत्सव में ही जिंदगी को उपहार बनाएं जिससे कोई उपहास न बना सके। यह विचार दिगंबर जैन परंपरा के वि यात जैन संत क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने सोनागिर स्थित आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनि श्री ने आगे कहा कि कितने दिन चाहिए यह महत्वपूर्ण नहीं है किस तरह चाहिए जिए यह महत्वपूर्ण है महावीर ने 30 वर्ष की भरी जवानी में सन्यास धारण किया 42 वर्ष की उम्र में केवल ज्ञान प्राप्त किया 72 साल की उम्र में निर्वाण प्राप्त कर इस दुनिया से चले गए। मगर कम समय में इतिहास बना गये। दुनिया में वही लोग अमर होते हैं जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या कुछ पढऩे लायक लिख जाते हैं। 
मुनि श्री ने कहा की जिंदगी जियो तो हंस कर जियो रोकर जीना भी क्या जिंदगी है रोते हुए पैदा होना दुर्भाग्य नहीं है रोते-रोते जीना और रोते-रोते मर जाना यह जिंदगी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। कुछ ऐसा करो कि जब तुम ना रहो तो दुनिया तु हारी याद में आंसू बहाए। सज्जन और दुर्जन कि बस इतनी ही पहचान है की दुर्जन जब तक जीता है तब तक दुनिया को रुलाता है जब जाता है तो वह भी दुनिया को हंसा कर जाता है लोग कहते हैं अच्छा हुआ पृथ्वी का एक पाप कम हो गया। मगर सज्जन जिंदगी भर दुनिया को हंसाता है मगर मृत्यु के समय रुला कर जाता है । उस के जाने पर लोग कहते हैं दुनिया को अभी इस कि  बहुत जरूरत थी बेचारा जल्दी चला गया।
चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मुनिश्री के प्रतिदिन सोमवार से शनिवार तक शाम 7 बजे से 7-30 बजे तक ओर रविवार को दोपहर 3-30 से 4-30 तक  विशेष प्रवचन होंगे। यह आयोजन मुनि श्री का प्रवास स्थल सोनागिर सिद्ध क्षेत्रफल स्थित अमोल वाली धर्मशाला के आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में चलेंगे।