मृत्यु तो सभी को आना है इससे कोई नहीं बच सकता यह जिंदगी का शाश्वत सत्य है - मुनिश्री

Aug 05 2020

ग्वालियर। तन करो आधी और व्याधि है मन का रोग उपाधि है और इन तीनों से जो ऊपर उठ गया उसे मिलती समाधि है। भोगों के बिस्तर पर पैदा जरूर हो मगर मृत्यु साधना के संस्थार पर होना चाहिए। शेर जिस गुफा में पैदा होता है उस गुफा में मृत्यु को प्राप्त नहीं होता इसीलिए तो ज्ञानियों ने कहा है ऐसी जगह प्राणों का विसर्जन करें जहां अपना कोई ना हो जहां अपना कोई नहीं होगा वहां परमात्मा तु हारे साथ होगा। यह विचार क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज में सोनागिर स्थित आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही।
 मुनि श्री ने आगे कहा कि कीड़े की तरह जीना अज्ञानी का लक्षण है कीचड़ में कमल की तरह जीना ज्ञानी का लक्षण है। दोनों पैदा कीचड़ में होते हैं मगर गुणधर्म दोनों के अलग अलग है ज्ञानी बनकर मरना जिंदगी का कर वसूल करना है और कीड़े की तरह मरना जिंदगी का उपहास उड़ाना है। मृत्यु तो सभी को आना है इससे कोई नहीं बच सकता यह जिंदगी का शाश्वत सत्य है।
मौत से किसी की रिश्तेदारी नहीं है 
मुनि श्री ने आगे कहा कि डोली उठे ना उठे मगर अर्थी जरूर उठेगी। दुनिया का सबसे बड़ा शास्त्र मृत्यु का शास्त्र है जिसे भूलकर नहीं हमेशा याद रख कर जीना चाहिए। मौत से किसी की रिश्तेदारी नहीं है आज हमारी तो कल तु हारी बारी है अगर संत नहीं बन सकते तो घर परिवार के बीच रहते हुए भरत चक्रवर्ती राजा जनक की तरह निरासक्त भाव पूर्वक जीयें। लोग मंदिर और मस्जिद गुरुद्वारा और चर्च मैं तो हर रोज आते हैं मगर अब जरूरत है ह ते में एक दिन शमशान जाने की जिससे तु हें याद रहे कि 1 दिन तु हें भी यही आना है। भगवान के दर्शन से जिंदगी में चमत्कार हो या ना हो मगर श्मशान में जल रहे आग जले हुए थे तु हारी जिंदगी में चमत्कार जरूर लाएंगे। फिर आदमी अहम और बहिम दोनों से मुक्त होकर जिएगा।
चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मुनिश्री के प्रतिदिन सोमवार से शनिवार तक शाम 7  बजे से 7-30 बजे तक ओर रविवार को दोपहर 3-30 से 4-30 तक  विशेष प्रवचन होंगे। यह आयोजन मुनि श्री का प्रवास स्थल सोनागिर सिद्ध क्षेत्रफल स्थित अमोल वाली धर्मशाला के आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में चलेंगे।