शाला में सेनेटाइजिंग न होने से गौवंश को हो सकता है कोरोना
Aug 03 2020
ग्वालियर। शहर में छिड़काव पर अब तक कई हजार लीटर सेनेनटाइजर खर्च करने का दावा करने वाले नगर निगम की हकीकत यह है कि 7000 से अधिक गायों के लाल टिपारा गौशाला में रहने के बावजूद यहां अन्य तैयारियां तो दूर इसे सेनेटाइज भी नहीं किया जा रहा। निगम की इस तरह की लापरवाही कहीं गौवंश के लिए घातक साबित न हो जाए।
शहर की सबसे बड़ी गौशाला लाल टिपारा मुरार में है, जिसमें वर्तमान में सात हजार से अधिक गौवंश हैं, जो कि ठसाठस भरे हुए हैं। इनमें एक फुट का भी फासला नहीं है। इस तरह के हालात के बावजूद यहां निगम द्वारा जरा भी सतर्कता नहीं बरती जा रही। यह चारा भी एक साथ ही खा रहे हैं। यदि यहां कोरोना वायरस पनपता है तो हालात बिगड़ सकते हैं। विषम हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य परिस्थितियों में ही यहां गंदगी के चलते बीमारियां फैलने लगती है और कई बार बड़ी सं या में गायों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद भी निगम गंभीरता नहीं बरत रहा।
उधर जहां मौके की नजाकत को समझते हुए जू प्रबंधन ने देश के साथ यहां भी अलर्ट होते हुए वन्य प्राणियों की निगरानी लगातार की जा रही है। यही नहीं इन्हे सुरक्षित रखने के लिए लगातार दवा के साथ ही खाने-पीने की चीजों की भी जांच कर ही इन्हें परोसा जा रहा है। वहीं गौशाला में ना तो गोवंश की जांच की जा रही है, वहीं चारा भी सीधे ही परोसा जा रहा है। गौवंश के बीच डिस्टेंस न होने के कारण यहां वायरस तेजी से फैल सकता है। उधर वह सामाजिक संस्थाएं, समाजसेवी जो गायों के हितेषी होकर सामने आते हैं, वह भी गंभीर हालात में इसकी सुध नहीं ले रहे हैं। नगर निगम द्वारा सारे शहर को हर रोज सेनेटाइज करने का दावा किया जा रहा है, वही गौशाला की ओर निगम अमले ने रुख तक नहीं किया जबकि यहां सेनटाइजेशन की जरूरत है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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