कारगिल विजय दिवस पर शहीद 527 सैनिकों की याद में झुके शस्त्र, किया नमन

Jul 26 2020

ग्वालियर। छोटी वस्तुओं से लेकर बड़ी वस्तु और हर अनमोल वस्तु को भी उपहार में दे सकते हैं लेकिन जब जान देने की बारी आती है तो स ाी के कदम सहम जाते हैं और वह सोच में पड़ जाते हैं कि अपने प्राण दें या नहीं। जीवन के अंतिम दौर में भी प्राणों को बचाने के लिए भरपूर कोशिश की जाती है, लेकिन सैनिक ही हैं जो अपने प्राण देने में पीछे नहीं हटते और भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देते हैं। ऐसे वीर शहीदों से प्रेरणा लेकर देश रक्षा और विकास के लिए सभी को मिलकर पहल करनी होगी।
यह रविवार को महाराज बाड़े पर कारगिल शहीद दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साडा के पूर्व अध्यक्ष राकेश जादौन ने कही। कोरोना महामारी के चलते इस आयोजन को सीमित किया गया और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शहीद सैनिकों को शहरवासियों ने नमन किया लेकिन उससे पहले सेना के जवानों ने मातमी धुन के साथ शस्त्रों को झुकाया।
कारगिल युद्ध में विजय का परचम फहराने के लिए 527 सैनिकों और अफसरों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। इन शहीदों को नमन करने के लिए पुष्पचक्र अर्पित किए गए और मातमी धुनों के साथ कदमताल मिलाते हुए अतिथियों ने नम आंखों से पुष्पांजलि अर्पित की। सेना के बैण्डों द्वारा मातमी धुन बजाई गई तो सभी के सिर झुक गए और अपने स्थान पर खड़े होकर वह वीर शहीदों को नमन करते हुए भारत माता के जयकारे लगाए। श्री जादौन ने कहा कि संतों से पहले सैनिकों को पूजा जाए, क्योंकि वह अपने घर परिवार की चिंता किए बगैर देश की सीमाओं पर तैनात रहकर हम लोगों की रक्षा करते हैं। कार्यक्रम को विहवल सेंगर ने संबोधित किया। 
 कारगिल शहीद दिवस पर हुए कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति गीत की प्रस्तुति दी गई। नन्हीं बालिका मंत्रणा शर्मा ने काव्य पाठ किया। 29वीं बटालियन के सैनिकों ने शस्त्र झुकाकर सलामी दी तो 19वीं रेजीमेंड के जवानों ने बैंड की प्रस्तुति देकर शहीद सैनिकों को नमन किया। 
कतारबद्ध तरीके से चढ़ाए पुष्प
527 शहीदों को नमन करने के लिए सुबह से ही महाराज बाड़े पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था और शहीदों के चित्रों पर नमन अतिथियों ने किया। सेना के जवान कदमताल मिलाते हुए अतिथियों को ले जा रहे थे, जहां वह पुष्पचक्र अर्पित कर रहे थे, इसके बाद ड्यूटी पर तैनात पुलिस के जवानों ने शहीदों को पुष्प अर्पित किए। वहीं शारीरिक दूरी का पालन करते हुए शहरवासियों ने भी नमन किया। 
कोरोना संक्रमण के चलते आज बाजारों के शटर भले ही डाउन हों लेकिन महाराज बाड़े पर देशभक्ति की बयार लगी हुई थी। सुबह से ही शहरवासी शारीरिक दूरी का पालन करते हुए कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को याद कर रहे थे तो वहीं राष्ट्रगान का आयोजन किया गया। भारत विकास परिषद शाखा समर्पण द्वारा 2 मिनट राष्ट्रगान के नाम कार्यक्रम किया गया। आज सुबह कारगिल शहीद कार्यक्रम शुरू होने से पहले राष्ट्रगान हुआ। राष्ट्रगान की धुन बजते ही वाहनों के पहिए अपनी जगह पर थम गए और राष्ट्रगान के स मान में सभी लोग वाहनों से उतरकर नीचे खड़े हो गए। 
सैनिक लिखते हैं वीरगाथा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेना के कमांडिंग ऑफिसर एमएस चहल ने कहा कि आज से 20 साल पहले 1999 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे और उन्होंने देश सेवा और अमन, चैन के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया। पड़ोसी देश पाकिस्तान से अमन और शांति का अनुबंध हुआ था लेकिन पाकिस्तान ने अपना वादा तोड़ दिया और उस अनुबंध की इज्जत किए बिना कारगिल पहाड़ी की सीमा को पार कर घुसपैठियों और मुजाहिद्दीनों के साथ हमला कर दिया था, जिसका मुंह तोड़ जवाब भारत के लगभग 2 लाख सैनिकों ने दिया और लगभग 60 दिन तक चले इस युद्ध का 26 जुलाई को अंत हुआ, जिसमें 527 सैनिकों और सेना के अफसरों ने अपने प्राणों की आहुति दी और 1300 सैनिक घायल हुए। कारगिल पहाड़ी पर तिरंगा लहराकर विजय हासिल की। उन्होंने कहा कि सैनिक वीरगाथा का इतिहास लिखते हैं चाहे फिर कोई भी युद्ध हो वह अपने प्राणों की चिंता नहीं करते। भारत माता की रक्षा और तिरंगे की शान के लिए हमेशा आगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि जिन सीमाओं पर विदेशियों ने अपने झंडे लगा दिए थे, वहां सैनिकों ने तिरंगा लहराया है।