अब जनता के हाथ में है कि वे कितनी रियायत लें: जिलाधीश

Jul 22 2020

ग्वालियर। कोरोना संक्रमण के चलते ग्वालियर वालों ने पहला लॉकडाउन 22 मार्च को देखा था और इसके बाद वे इतनी बार बाजार बंद होना और बाजार खुलना देख चुके हैं कि उन्हें गिनती ही याद नहीं है। सात दिनों के लॉकडाउन के बाद बुधवार को ग्वालियर के शहरी क्षेत्र को फिर अनलॉक किया गया है। यानी सभी बाजार खुले हैं। कहीं आने-जाने पर कोई रोक नहीं है। सिर्फ वे ही स्थान बंद हैं जहां पर 22 मार्च से ताले लटके हुए हैं। इसके अलावा काफी सारी चीजों पर धीरे-धीरे करके रियायत दी जा चुकी है। जिला प्रशासन की कोशिश है कि ग्वालियर को धीरे-धीरे पटरी पर लाया जाए पर होता यह है कि जैसे ही ढील मिलती है, ग्वालियर की सड़कों पर इतनी रेलमपेल मच जाती है कि खामोश पड़ा कोरोना फिर जी जाता है और लोगों के लिए मुसीबत बन जाता है।  कलेक्टर ग्वालियर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा, अब यह लोगों के हाथ में है कि वे कितने संयम से रहते हैं और कितनी अधिक रियायतें ले पाते हैं।
कलेक्टर ने उन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जो वे अपेक्षा ग्वालियर वालों से रखते हैं। उन्होंने कहा, 22 मार्च से 21 जुलाई तक का वक्त कम नहीं होता किसी को नई जीवन शैली में ढलने के लिए। खासतौर से तब जब बात उस संक्रमण की हो जिसकी अभी वैक्सीन दुनिया में ही अंडर ट्रायल है। उन्होंने कहा 120 दिनों में लोगों को समझ में आ जाना चाहिए कि आगे अब उन्हें कैसे रहना है।                     
 कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह कहते हैं कि लोग कहते हैं 100 मरीज मिलने से क्या होता है? मैं कहता हूं सौ की सं या ग्वालियर की आबादी के लिहाज से भले छोटी लगती हो पर संक्रमण फैलाने के लिहाज से काफी बढ़ी है। यदि बार-बार ग्वालियर में लॉकडाउन नहीं किया गया होता तो यह आंकड़े काफी बढ़ गए होते। उन्होंने कहा कि हर रोज 15 से 20 केस सि पटंप्स वाले आना भी अच्छे लक्षण नहीं हैं।