मेरे तो सब कुछ प्रभु ही है प्रभु के सिवा मेरा कोई नहीं है - मुनिश्री

Jul 16 2020

  ग्वालियर। सोनागिर हिरणी पुत्र प्रेम के वशीभूत होकर शेर के सामने उसे बचाने के लिए लडऩे को तैयार हो जाती है उसी प्रकार भक्त शक्ति ना होने पर भी भगवान की भक्ति करने के लिए  कारण दुनिया से लडऩे को तत्पर हो जाता है। उसके हृदय में बस एक ही बात रहती है मेरे तो सब कुछ प्रभु ही है प्रभु के सिवा मेरा कोई नहीं है! यह विचार क्रांतिवीर मुनि प्रतीक सागर महाराज ने अमोल धर्मशाला स्थित आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में भक्तामर प्रवचन माला के पांचवे दिन धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनि श्री ने आगे कहा कि भक्ति और प्रेम में कोई अपेक्षा नहीं होती है और जहां अपेक्षा होती है वहां प्रेम नहीं होता है । प्रेम लुटाया जाता है और भक्ति की जाती है। प्रेम आकाश से बरसने वाले जल की तरह है। जो सभी जगह एक जैसा गिरता है। बासना तालाब का पानी जो एक ही जगह ठहर जाता है और वही सड़ जाता है। प्रेम व्यक्ति के प्रति नहीं सृष्टि में पैदा होने वाले सभी जीवो से जोड़ता है। जो व्यक्ति से जोड़ता है वह वासना होती है वासना का जहर जिंदगी को नीचे की ओर ले जाता है नर्क और निगोध की यात्रा करता है। निर्मल प्रेम स्वर्ग और निर्माण की राह दिखाता है जिस पर चलकर भक्त भगवान स्वरूप हो जाता है ।
मुनि श्री ने आगे कहा कि सभी धर्मों ने प्रेम को स्वीकार किया है जीसने कहा लव इज गौड, मीरा ने कहा मैं तो प्रेम दीवानी हूं, भगवान महावीर स्वामी ने कहा जियो और जीने दो, रहीम ने कहा रहिमन धागा प्रेम का, कबीर ने कहा ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय, सभी के कहने के अंदाज़ अलग-अलग है मगर इशारा एक ही दिशा में है। प्रेम भक्ति मुक्ति शक्ति सभी में ढाई अक्षर है जो प्रेम का ढाई अक्षर पढ़ लेता है फिर उससे किसी ग्रंथ को पढऩे की जरूरत नहीं पड़ती है।  
चातुर्मास समिति के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मुनिश्री प्रतीक सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में आचार्य धर्म भूषण महाराज के पावन सानिध्य में 19 जुलाई रविवार को दोपहर 3 बजे से अमोल वाली धर्मशाला आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में विशेष धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।