धन तो आने के बाद चला जाता है। मगर ज्ञान अगले जन्म तक साथ रहता है-मुनिश्री

Jul 14 2020

ग्वालियर। ज्ञान सभी के अंदर है ज्ञान के अभाव में जीव चेतन नहीं अचेतन कहलाएगा ज्ञान जीव की सबसे अनमोल दौलत है। जिसे चोर चुरा नहीं सकते लुटेरे लूट नहीं सकते है धन तो आने के बाद चला जाता है। मगर ज्ञान अगले जन्म तक साथ रहता है। ज्ञान के बिना राजा का पुत्र भी पशु के समान है। ज्ञानी बने मगर अहंकारी ना बने। क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने अमोल धर्मशाला स्थित आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में भक्तांबर प्रवचन माला के तीसरे दिन तीरे काव्य पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही!
 मुनि श्री ने आगे कहा कि अपने से बड़ों के चरणों में बड़ा बनकर नहीं छोटा बनकर के जाएं । जो छोटा बनकर जाता है वह सब कुछ प्राप्त कर लेता है। मगर जो बड़ा बनकर जाता है वह केवल बड़बड़ करता है। मगर पा कुछ नहीं पाता है पांडित्य का प्रदर्शन ज्ञानी नहीं करता है जो मूर्ख होता है वह अपने ज्ञान का प्रदर्शन करता है।आचार्य मानतुंग तीसरे नंबर के काव्य में अपने आप को बुद्धिहीन बालक की उपमा देकर अपने आप को संबोधित कर रहे हैं उन्होंने कहा चंद्र बिंब को पकडऩे की जीद बालक के अलावा और कौन कर सकता है जिनके अंदर की प्रज्ञा जाग जाती है वह बुझे हुए दीपक को भी प्रज्वलित कर दिया करते हैं। मगर जिन के प्रज्ञा का जागरण नहीं हुआ है वह केवल बनावटी जिंदगी जीते हैं। असल जिंदगी में उनके कुछ नहीं होता है भक्ति का मार्ग भोलापन का मार्ग है जहां ज्ञानी बन कर नहीं सरल चित लेकर आने वाले को परमात्मा के दरबार में प्रवेश अवश्य मिल जाता है।
मुनि श्री ने आगे कहा कि दिखावट में बनावट है बनावट में मिलावट है पर मिलावट में गिरावट है भक्ति का मार्ग में दिखावटी और मिलावट नहीं होना चाहिए वहां मात्र हृदय की सच्चाई और मन की पवित्रता होना चाहिए। तभी हम इन दो नेत्रों से परमात्मा को देख पाएंगे। तीर्थंकर का जब जन्म होता है सौधर्म  इंद्र 1000 नेत्र बनाकर तीर्थंकर बालक को देखता है तब भी वह तृप्त नहीं होता है। मगर हम दो नेत्रों से भगवान को देखते हैं पर अपने आप को तृप्त मान लेते हैं यह हमारी भक्ति का ओझापन है। 
चातुर्मास समिति के सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मुनिश्री की अमृतवाणी में 12 जुलाई से 48 दिनों तक प्रतिदिन सोमवार से शनिवार तक शाम 7 बजे से 7-30 बजे तक रविवार को दोपहर 3-30 से 4-30 तक भक्तांबर अमृत प्रवचन माला पर विशेष प्रवचन होंगे। यह आयोजन मुनि श्री का प्रवास स्थल सोनागिर सिद्ध क्षेत्रफल स्थित अमोल वाली धर्मशाला के आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में होगा।