रिश्ता वह नही होता जो दुनिया को दिखाया जाता है रिश्ता वह होता है जो दिल से निभाया जाता है-मुनिश्री

Jul 10 2020

ग्वालियर। सोनागिर रिश्ता वह नहीं होता जो दुनिया को दिखाया जाता है रिश्ता वह होता है जो दिल से निभाया जाता है अपना कहने से कोई अपना नहीं होता अपना तो वह होता है जिसे दिल से अपनाया जाता है। रिश्तो को बनाने में नहीं अपितु निभाने में विश्वास होना चाहिए। रिश्ते बनाना उतना ही आसान है जैसे मिट्टी से मिट्टी पर मिट्टी लिखना।
 मगर रिश्तो को निभाना उतना ही कठिन है जैसे पानी से पानी पर पानी लिखना। *यह विचार क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर जी महाराज ने अमोल धर्मशाला स्थित आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्म सभा को स बोधित करते हुए कही।
 मुनि श्री ने आगे कहा कि परिवार में सुई बनकर जोडऩे का कार्य करें कैंची बनकर काटने का काम नहीं करें। रिश्तो में दीवार भले ही खड़ी हो जाए पर दरार नहीं पढऩा चाहिए। यह सच है कि जब कोई अपना दूर चला जाए तकलीफ होती है पर असली तकलीफ तब होती है जब कोई अपना पास होकर के भी दूरियां बना लेता है। रिश्तो मैं मिठास बनाए रखने के लिए कभी-कभी समझौता भी करना पड़ता है। रिश्ता जब टूटने लगे और आपके झुकने से अगर वह बच सकता है टूटने से अच्छा है झुक जाएं। यही समझदार व्यक्ति का लक्षण है अकड़ से रिश्ते टूटते हैं झुकने से रिश्ते मजबूत होते हैं। मुनि श्री ने आगे कहा कि रिश्ता और शीशा दोनों बहुत नाजुक होते हैं फर्क सिर्फ इतना होता है शीशा गलती से टूटता है रिश्ता गलतफहमी से टूटता है घर और परिवार में कितना भी लड़ झगड़ ले मगर आपस में बोलचाल बंद नहीं होना चाहिए अगर एक बार आपस में संवाद बंद हो जाता है तो दोनों के बीच में चाइना की दीवार से भी बड़ी गलतफहमी की दीवार खड़ी हो जाती है। जिसे तोडऩे के लिए बहुत वक्त गुजर जाता है फिर भी वह रिश्तो में मिठास और गलतफहमी दूर नहीं हो पाती है। रिश्तो को गाय की तरह जीना चाहिए सर्प की तरह नहीं गाय घास खा कर के भी पंचामृत देती है सर्प दूध पीकर भी जहर देता है । जिस घर और परिवार में रहते हैं उस घर परिवार की कमियों को कभी दुनिया के सामने ना आने दे। क्योंकि दुनिया के पास समाधान नहीं है मगर आप की उलझनों को और बढ़ाने का रास्ता है ।