सात्विक जीवन जीना भी गुरू की ही आराधना है-मुनिश्री

Jul 05 2020

 ग्वालियर। गुरू पूर्णिमा पर शिष्य अपने गुरूदेव की आराधना और भक्ति करते हैं। यहा आराधना शिष्य के लिये बहुत महत्व है। यह आराधना से मतलब है हमारा खाना, पीना, बैठना, सोना, बोलना, यह सब गुरू के अनुरूप होता है। सात्विक जीवन जीना भी गुरू की ही आराधना है। गुरू भक्ति स यकत्व है। गुरू के उपदेश से प्रकट हुआ ज्ञान स यकज्ञान हैं। उनका अनुसारण स यकचारित्र है। इनके बिना कभी निर्वाण नहीं हो सकता है। गुरू के बिना किसी को विपुल शब्दज्ञान होना असभंव है। अत: गुरू उपादेश अर्थाव स्वीकर करने योग्य है। यह विचार मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने रविवार को नई सडक स्थित चंपाबाग धर्मशाला में वर्शायोग कलश स्थापना एवं गुरू पूर्णिमा पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज ने सबोधित किया।
  जैन समाज के प्रवक्ता सचिन आदर्श कलम ने बताया कि कलश स्थापना कार्यकम के आरंभ में मंगलचरण बह्मचारिणी प्रियंक दीदी ने किया। सोशल डिस्टेंसिग का पालन व माक्स का उपयोग कर चातुर्मास समिति जैन मिलन ग्वालियर एवं सकल दिगंबर जैन समाज बृहत्तर ग्वालियर समिति के डॉ वीरेंद्र गंगवाल, अजीत शास्त्री, विकास गंगवाल, जैन मिलन के अध्यक्ष संजीव अजमेरा, सचिव योगेश बोहरा, क्षेत्रीय अध्यक्ष नीरज जैन, निर्मल पाटनी, धर्म वरैया, विनय कासलीवाल, पकज बाकलीवाल आदि ने मुनिश्री के चरणों में श्रीफल चरण कर चातुर्मास की आज्ञा के साथ अर्शीवाद लिया। कार्यकम का संचालन उमेश जैन एवं विनय कासलीवाल व आभार अध्यक्ष सजीव अजमेरा ने किया।
   कार्यक्रम में मुनिश्री से पूर्व केबीनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह एवं पूर्व सभापति बृजेद्र जादौन ने मुनिश्री से अशीवाद लिया। सभी का स मान तिलक और टुपटे पहनकर आयोजन समिति ने किया।
     मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज के चातुर्मास का प्रथम मंगल कलष महेशचंद जैन परिवार ग्वालियर को मिला। दूसरा कलश पंकज राजू जैन ग्वालियर तथा तीसरा कलश पवन जैन पत्रकार परिवार को सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुनिश्री एवं पडित अजीत शास्त्री एवं चंद्राप्रकाश जैन ने मंत्रो के साथ विधि विधान के साथ मंगल कलष की स्थापना कराई गई।