चातुर्मास तप, संयम, साधना एवं आत्मा का कल्याण करने का पर्व है-मुनिश्री

Jul 04 2020

ग्वालियर। जैन धर्म में चातुर्मास के 4 माह संतों के लिए तप, संयम, साधना एवं आत्मा का कल्याण करने का पर्व है। ग्वालियर में ज्ञान की गंगा का श्रावक, ध्यान, तपस्या कर लोगों को धर्म मार्ग की ओर प्रेरित करेंगे। चातुर्मास में संतों के प्रवचन से जैन समाज के व्यक्ति को समागम का मौका मिलता रहेगा। संतों की वाणी व्यक्ति के अंदर आत्मा शरीर कषाय, पापों को धोने का काम करेगा। चातुर्मास मे व्यक्ति धर्म के रथ पर सवार होकर आत्म साधना में रहकर ध्यान और तप से आत्मा कल्याण करेगे। यह बात मुनिश्री विहर्श सागर महाराज ने जैन मिलन ग्वालियर की ओर से शनिवार को नई सडक स्थित चंपाबाग धर्मशाला में संबोधित किया। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज एवं क्षुल्लक विश्वत्तर सागर महाराज मौजूद थे। मुनिश्री ने चौदस पर चातुर्मास कलश की क्रिया पूर्ण की। रविवार को स्थापना करेंगे।
  जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि जैन मिलन ग्वालियर एवं सकल जैन समाज की ओर से आर्षमय पावन बर्षयोग 2020 का मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज, मुनिश्री विजयेश सागर महाराज एवं क्षुल्लक विश्वत्तर सागर महाराज के सानिध्य में पंडित अजीत शास्त्री व चंद्रप्रकाश चंदर जैन ने शनिवार को चौदस पर मंत्रउच्चरण के साथ मंगल कलशों को जल से शुद्धि कर पीली सरसों, कपूर, सुपाड़ी, हाल्दी की गाठ्, चॉदी के सिक्के और स्वातिका आदि साम्रगी भरकर मंत्रो के द्वारा चातुर्मास का संकल्प लिया गया। वही चातुर्मास की सीमा निधारित कर क्रिया सपन्न की गई।  
   जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि जैन मिलन ग्वालियर एवं सकल जैन समाज की ओर से मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज संसघ की 05 जुलाई को प्रात: 8:00 बजे से सोशल डिस्टेंसिग का पालन करते हुए माक्स का उपयोग कर पुरुष व्हाईट परिधान एवं महिलाए केशरिया सॉडी में आर्शमय वर्षयोग कलश स्थापना एवं गुरु पूणिमा कार्यक्रम स मालित होगे।