जो मानवता से प्यार करता हो मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता है : मुनिश्री

Jul 02 2020

ग्वालियर। सोनागिर धर्मात्मा वह नहीं जो मंदिर मस्जिद में पूजा, 5 बार की नमाज अदा करता हो अपितु धर्मात्मा वह हैं जो मानवता से प्यार करता हो मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता है। जो व्यक्ति इंसान की गोद में जन्म लेकर इंसान से प्यार नहीं कर सका वह भगवान से भी प्यार नहीं कर सकता है। भगवान से वही प्यार कर सकता है जो चींटी के अंदर भी भगवान देखने की नजर रखता हो। यह बात क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने गुरुवार को सोनागिर भट्टारा कोठी के सामने स्थित अमोल धर्मशाला के आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही।
आज सारा देश रोगी हो चुका है।
 मुनि श्री ने आगे कहा कि भारत देश में जितने मंदिर है उससे अधिक विद्यालय हैं जितने विद्यालय हैं उससे अधिक अस्पताल हैं आज सारा देश रोगी हो चुका है। घरों में नमक मिर्च का एक डब्बा मिलेगा मगर दवाइयों की अनेक वोतल  मिलेगी । आज का आदमी रोटी से ज्यादा दवाइयों पर जिंदा है। जिंदगी में धन है मगर शरीर निरोगी नहीं है तो समझो तु हारे पास कुछ नहीं है। पहला सुख निरोगी काया है दूसरा सुख धन और संपदा है। लोगों के पास दूसरा सुख तो है। मगर पहला सुख नहीं है जिस घर में अनीति और अन्याय से कमाई आती है उस घर में कभी भी सुख और शांति की वृद्धि नहीं होती। इसलिए भगवान के चरणों में बैठकर प्रार्थना करें कि प्रभु इतना देना कि में मेरा परिवार कभी भूखा ना रहे और कोई अतिथि आ जाए तो वह भी भूखा ना जाए।
धर्म सभा के पश्चात मुनि श्री कि आरती की गई। चातुर्मास समिति के प्रचार प्रमुख सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया की अमोल धर्मशाला स्थित आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में मुनि श्री के प्रतिदिन शाम 6-45 बजे मंगल प्रवचन आरती का कार्यक्रम होगा।