सूर्य ग्रहण में नहीं किया अन्न-जल ग्रहण
Jun 21 2020
ग्वालियर। आषाढ़ कृष्ण की अमावस्या के दिन रविवार को सुबह 10 बजकर 16 मिनट पर सूर्य ग्रहण शुरू हो गया। ग्रहण का सूतक लगने के कारण मंदिरों के पट शनिवार की रात 10 बजे पूजा अर्चना के बाद बंद कर दिए गए थे। यह पट ग्रहण की समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोले गये। इससे पहले शहर के सभी मंदिर की साफ-सफाई हुई और भगवान का अभिषेक एवं श्रृंगार हुआ।
शनिवार की रात्रि 10 बजकर 19 मिनट से सूर्यग्रहण का सूतक लग गया। ग्वालियर संभाग में सूर्यग्रहण सुबह 10 बजकर 19 मिनट से प्रारंभ होकर दोपहर 1 बजकर 52 मिनट तक देखा गया। पूरे देश में सूर्यग्रहण की कुल अवधि 5 घटें 48 मिनट 3 सेकंड तक रही। शहर में कई लोगों ने इंफ्रारेट ग्लास से खगोलीय घटना को देखा और अचंभित होकर अपने मोबाइल में कैद किया। सूतक लगने से पहले ही गृहणियों ने तुलसी और गंगाजल को पानी में मिला दिया।
धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के दौरान देव मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए। ग्रहण की समाप्ति के बाद नदियों और पानी में गंगाजल को डालकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद दान करने से आर्थिक प्रगति होती है। सूतक से लेकर ग्रहण समाप्ति तक भोजन करने से दूर रहे।
सूर्य ग्रहण देखने का नजारा देखने के लिए लोग सुबह से ही तैयारी कर रहे थे, लेकिन दोपहर 11 बजे आसमान में बादलों ने ढेरा डाल लिया और सूर्य बादलों के पीछे छिप गए। जिससे लोग सूर्य ग्रहण का नजारा देखने से वंचित तो हो गए, लेकिन उन्हें मौसम का यह परिवर्तन बहुत खला।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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