संडे लॉक करने की तैयारी रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस, मिठाई की दुकानों पर होगा कारोबार
Jun 20 2020
ग्वालियर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लोगों के मूवमेंट को रोकने के लिए जो सप्ताह में एक दिन सब बंद करने की प्लानिंग की गई थी वह अधूरी ही रही। जिला प्रशासन ने रविवार को बाजार बंद, मॉल,धार्मिक स्थल बंद करने के आदेश शुक्रवार को जारी कर दिए जिसमें होटल, रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस,मिठाई की दुकानों को खुला रखा गया है। वहीं शराब की दुकानें भी खुली रहेंगी। कोरोना संक्रमण को लेकर बनाई गई क्राइसिस मैनेजमेंट समिति के प्रस्ताव पर सीएम की हरीझंडी मिलने के बाद रविवार को सब बंद करने का निर्णय लिया गया था लेकिन जारी आदेश में लॉकडाउन अधूरा ही रह गया।
हाल ही में हुई क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में समिति के सदस्यों ने सप्ताह में दो दिन टोटल लॉकडाउन के लिए सहमति दी थी। दिन शनिवार और रविवार निर्धारित किए गए थे। इसको लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी राजी हो गए थे और यह प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया। सीएम की वीडियो कांफ्रेसिंग के दौरान जब क्राइसिस मैनेजमेंट टीम के इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई तो सीएम ने रविवार के लिए सहमति दे दी। इसके बाद शुक्रवार को जिला प्रशासन ने रविवार को बाजार बंद करने के लिए धारा-144 के तहत आदेश जारी कर दिए।
लॉक डाउन खोलने के बाद भी हजारों घरेलू कामगार महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं। 22 मार्च से एकदम इनका काम बंद हो गया। लगभग 80 प्रतिशत लोगों ने तो मार्च का वेतन पूरा दे दिया। लेकिन बाकी लोगों ने मार्च का पूरा वेतन भी नहीं दिया। अप्रैल और मई के महीने में तो इन कामगार महिलाओ को ना तो वेतन मिला और ना ही काम । जून में जब सभी काम और रोजग़ार शुरू किये जा रहे हैं। तब भी घरेलू कामगार महिलाओं का रोजग़ार छिन गया है।
पूरे देश में लाखों महिलाये घरों में झाड़ू पोछा बर्तन कपड़ों कि सफाई और खाना बनाने का काम करके अपना परिवार चलाती हैं कोरोना के डर से लॉक डाउन हटने के बाद भी 80प्रतिशत घरेलू कामगार महिलाओ को लोग काम पर नहीं बुला रहे हैं। इसमें सबसे चिंताजनक बात है कि इनके बारे में ना तो सरकार सोच रही है और ना ही वो नियोक्ता जिनके परिवारों में इन्होंने सालों साल काम किया है। आज ये सभी लोग इन्हें कोरॉना वाहक की नजर से देख रहे हैं। विभिन्न रहवासी समितियों ने बाकायदा सर्कुलर निकाल कर घरों मै काम करने वाली महिला का अपने कैंपस /कॉलोनी में आना प्रतिबंधित कर दिया है।
ये सरासर अन्याय है। उनके काम/रोजग़ार के अधिकार का उल्लघंन है। जैसे सभी मजदूरों एवं लोगों का काम का अधिकार है, वैसे ही उन्हें भी काम का अधिकार है। यदि कोई परिवार उन्हें काम पर बुलाना चाहता है, तो कोई रहवासी समिति कैंपस, मोहल्ला या कॉलोनी में उन्हें आने-जाने से रोक कर काम से वंचित नहीं करें। चाहें, तो गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था हो। जिन परिवार को लगता है कि उनसे काम नहीं करवाना है, वे भले न करवाएं, लेकिन जो करवाना चाहते हैं, वहां तक जाने से उन्हें रोका नहीं जाए।
सरकार और समाज के लोगों की घरेलू कामगार महिलाओं के साथ किया का रहा यह व्यवहार असंवेदनशील है। क्योंकि ये महिलाएं हैं, ज़्यादातर दलित समुदाय से हैं और गरीब हैं। इसलिए इनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
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