शिक्षा से पहले संस्कार और व्यापार से पहले व्यवहार बहुत जरूरी : मुनिश्री

Jun 18 2020

ग्वालियर। परमात्मा के गुणों का अनुसरण कर जीवन पथ पर आगे बढना चाहिए। मनुष्य को शिक्षा से पहले अच्छे संस्कार प्राप्त करना चाहिए। मनुष्य लाख शिक्षित हो जाए अगर उसके संस्कार अच्छे नहीं हैं तो शिक्षित होना व्यर्थ हो जाएगा। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने गुरुवार को हरिशंकर पुरम में महेश जैन गुरुभक्त के निवास पर धर्मचर्चा में कही। इस मौके पर मुनिश्री वियजेश सागर महाराज मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि बिना संस्कारों वाली शिक्षा जीवन को आगे नहीं बढ़ा सकती। इसलिए शिक्षा से पहले संस्कार और व्यापार से पहले व्यवहार सीखना बहुत जरूरी है। इसी प्रकार परमात्मा को पहचानने से पहले माता-पिता को पहचानना जरूरी है। जो अपने माता पिता को नहीं पहचान सकता वह परमात्मा को भी नहीं पहचान पाएगा। उन्होंने कहा कोई भी अच्छी शुरुआत घर से होनी चाहिए।
मुनिश्री ने कहा कि जीवन में कहीं न कहीं विश्वास का होना आवश्यक हैं क्योंकि इसके बिना जीवन सुचारु रूप से नहीं चल पाता, एक छोटे से बच्चे को जब माँ हवा में उछालती हैं तो बच्चे को विश्वास रहता हैं कि माँ उसे गिरने नहीं देगी, एक मरीज़ को डाक्टर पर विश्वास रहता हैं कि डाक्टर उसे जीवन दान देगा, जऱा सोचिए अगर यह विश्वास न हो तो क्या हम जीवित रह पाएँगे, यह विश्वास ही हैं जो हमको एक दूसरे से जोड़े रखता हैं अगर यह डोर टूट जाए तो इसे फिर से बनाया नहीं जा सकता।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि 4 जुलाई से शुरू होने वाले चतुर्मास के लिए मुनिश्री विहर्ष सागर  महाराज एवं विजयेश सागर जी महाराज संसघ का चतुर्मास ग्वालियर में चातुर्मास के लिए जैन मिलन ग्वालियर, मुनि सुव्रतनाथ महिला मंडल शिंदे की छावनी, राजेश लाला मित्र मंडल, एवं सोनागिर में करने के लिए कमेटी के महामंत्री बालचंद जैन ने श्रीफल चढ़ाकर अनुमति मांगी है।