कोरोना की जांच करने वाले खुद संक्रमित न हो जायें

Jun 18 2020

ग्वालियर। अनजाने में ही सही कोरोना संक्रमण धीरे-धीरे पनप रहा है। ग्वालियर स्टेशन पर बाहर से आने-जाने वालों की डिटेल, स्क्रीनिंग करने वाला स्टाफ  डेढ़ महीने से बदला ही नहीं गया है। ये स्टाफ  पल-पल कोरोना के खौफ  में जी रहा है। ड्यूटी करने के बाद जब अपने घर पहुंचते हंै तो यही डर लगता है कहीं उनके चक्कर मे परिवार संक्रमित न हो जाये। क्योंकि लगातार ड्यूटी के बाद भी इनका ना तो इनकी जांच हुई है और ना ही निश्चित अवधि के बाद इन्हें क्वॉरेंटाइन किया गया है। जबकि अन्य विभागों में ड्यूटी बदली जाती है और संबंधित स्टॉफ को क्वारेंटाइन कर खतरे से बचाया जा रहा है। 
रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि सभी विभागों में कोरोना ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को एक  निश्चित ड्यूटी के बाद रिलीव दिया जा रहा है और उनकी जांच भी की जा रही है, लेकिन हम पिछले डेढ़ माह से ड्यूटी पर लगे हुए हंै और हमें ना तो बदला गया है और ना ही जांच कराई गई है, जबकि दूसरे जिलों से आने वालों की स्क्रीनिंग तथा जानकारी के दौरान उनके संपर्क में आते हंै, इससे हमारे साथ ही हमारों परिजनों को कोरोना संक्रमण का खतरा बना हुआ है। ड्यूटी कर जब घर जाते हैं तो डर लगता है कि हमारे साथ हमारा परिवार संक्रमण की चपेट में ना आ जाए। 
रेलवे स्टेशन पर बाहर से आने वाले यात्रियों की जानकारी नोट करने के लिए सात टीमें लगी हुई हैं, जो तीन शि टों में ड्यूटी करती हैं, इसमें 21 कर्मचारी रहते हंै। हर टीम में सात कर्मचारी रहते हैं और इनकी हर आठ घंटे में ड्यूटी बदल जाती है। वहीं हर टीम के साथ तीन-तीन डॉक्टर भी तैनात रहते हैं, जो हर आने वाले की स्क्रीनिंग करते हैं। इस तरह डॉक्टरों की पांच टीमें स्टेशन पर तैनात रहती हैं। 
11 हजार यात्रियों की हो चुकी है स्क्रीनिंग
एक जून से ट्रेनों का आना-जाना शुरू हुआ है और हर दिन करीब सात से आठ सैकड़ा लोग शहर में आ रहे हैं, इस तरह अभी तक करीब 11 हजार यात्रियों की स्क्रीनिंग कराई जा चुकी है। 
 आरपीएफ और जीआरपी की भी यही परेशानी
आरपीएफ और जीआरपी में पदस्थ जवान तथा अफसरों में भी वायरस के संक्रमण का डर है, क्योंकि यात्रियों के आने के बाद उन्हें प्लेटफार्म पर जाना पड़ता है और व्यवस्था बनानी होती है। ऐसे में कई लोग उनके संपर्क में आते हैं और भीड़ में कौन कोरोना पॉजीटिव है, इसका पता नहीं चलता है। ऐसे में वे हर समय खतरे के बीच रहकर ड्यूटी कर रहे हैं।