स्टेशन पर बैठकर कुली करते हैं अपनी बारी का इंतजार, घर का खर्च चलाना हुआ मुश्किल

Jun 16 2020

ग्वालियर। दिन-रात लोगों के शोरगुल और ट्रेन की आवाज से गूंजने वाला रेलवे स्टेशन इन दिनों महज चंद लोगों की आवाज से गूंज रहा है। यहां अगर सबसे ज्यादा आर्थिक रूप से कोई परेशान है तो वो हैं यहां के कुली। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर करीब सवा सौ कुली दिन-रात तैनात रहते हैं, लेकिन पिछले ढाई महीने से लगे लॉकडाउन और ट्रेनों के संचालन पर पाबंदी ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया है. कई कुली तो कर्जा लेकर अपने घर-गृहस्थी का खर्चा उठा रहे हैं।
  कोरोना महामारी के कारण बीते दो महीने से ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से बंद रहा है। हाल ही में जो कुछ रेलगाडिय़ां संचालित हुई हैं, उनमें यात्रियों की तादाद बेहद कम है। यात्री भी भारी भरकम लगेज लेकर इन दिनों ट्रेनों में नहीं चल रहे हैं, जिस कारण कुलियों की मजदूरी का मु य स्रोत भी अपने गिने-चुने रेल यात्री के रूप में ग्राहकों पर निर्भर रह गया है। अप ट्रैक पर सिर्फ चार ट्रेनें संचालित हो रही हैं जबकि डाउन ट्रैक पर 9 ट्रेनों का आगमन एक दिन में होता है। रेलवे के अधिकारियों ने कुलियों को एक बार में 10 से ज्यादा की सं या में आने की मनाही की है इसलिए कुली बारी-बारी से अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं। सामान्य दिनों में रेलवे के यह कुली करीब ढाई सौ से लेकर 300 रुपए तक कमा लेते थे, जो अब घटकर 50 से 60 रुपए रह गए हैं।