ज्ञान पाना है तो लगानी होगी खुद के भीतर डुबकी: मुनिश्री

Jun 15 2020

ग्वालियर। व्यक्ति खुद के भीतर छिपे ज्ञान को पहचान जाए तो फिर उसे किसी भी सांसारिक वस्तु की जरूरत नहीं रह जाती। लेकिन अगर ज्ञान पाना है तो मनुष्ट को खुद के भीतर डुबकी लगानी होगी। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने सोमवार को गोले का मंदिर  स्थित गुरुभक्त अजय जैन के निवास पर व्यक्त किए। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज मोजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि परिचय से दूर हो जाओ, अगर परिचय करना ही है तो स्वं परिचय करो। खुद को जानो और स्वयं के मूल्यों को पहचानो। क्योंकि स्वपरिचय ही व्यक्ति को मुक्ति मार्ग की ओर ले जाता है। उन्होंने कहाकि मनुष्य के सभी दुखों का कारण उसकी आकांक्षये है। मुनिश्री ने कहा कि मोह के पर्दे के कारण धर्म, संस्कृति और सुसंस्कारों का ज्ञान ही व्यक्ति को नहीं हो पाता है। लेकिन संस्कृति संस्कार बदलने से ही बदलती है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ओर मुनिश्री विजयेश सागर महाराज  हरिशंकर पुरम से सिटी सेंटर, आकाशवाणी चौराहे, मेला ग्राउंड से पद विहार कर गुरुभक्त अजय जैन के निज निवास गोले का मंदिर पहुँचे। इस मौके पर राजेश जैन, महेशचंद  जैन, विपुल जैन, अजय जैन, वीरेंद्र जैन, मयंक जैन, हर्ष जैन, संजीव जैन, आदि मुनिश्री के मंगल विहार में स िमलित थे।