धर्म का फूल हमेशा निर्भय की भूमि पर खिलता है-मुनिश्री
Jun 14 2020
ग्वालियर। जीवन अहो भाव से भरकर जिये, अहम भाव से भरकर नहीं। अहम भाव से भरकर जीवन जीने से व्यक्ति दुखी होता है, उसकी परेशानी कभी खत्म नहीं होगी। सुख और दुख मन की भाव दशा पर निर्भर है, जो हमें अच्छा लगता है वह सुख है और जो बुरा लगता है वह दुख है। धर्म भय और डर के कारण नहीं करना चाहिए। धर्म का फूल हमेशा निर्भय की भूमि पर खिलता है। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने रविवार को हरिशंकर पुरम में महेश जैन गुरुभक्त के निवास पर धर्मचर्चा में कही। इस मौके पर मुनिश्री वियजेश सागर महाराज मोजूद थे।
मुनिश्री ने कहाकि भय की बंजर भूमि पर नहीं। मगर आज कल लोग परभव ना बिगड़ जाए इस बात के डर के कारण या लोग मुझे नास्तिक न समझे इसलिए धर्म पाठ पूजा करते हैं। इसलिए उनको धर्म का फल प्राप्त नहीं होता है। धर्म के अनुसार जीवन जिए ना कि धर्म को अपने अनुसार चलाए।
मुनिश्री ने कहा कि सुख और दुख एक सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों का स्वागत करो। जिस प्रकार घर में चाचा और दामाद दोनों का स्वागत होता है। सुख आए तो फूलना नहीं और दुख आए तो रोना नहीं। दोनों में बैलेंस बनाकर जीना ही ज्ञान जीव का लक्षण है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर जी महाराज ने विशेष मंत्रो का उच्चारण कर भगवन आदिनाथ का मयंक जैन, हर्ष जैन, पंकज जैन और अजय जैन ने अभिषेक ओर शांतिधारा कोरोना से मुक्ति दिलाने के लिए की।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









