80 दिन से थमें हैं बसों के पहिए, सरकार नहीं ले पा रही फैसला

Jun 11 2020

ग्वालियर। पूरा देश अनलॉक हो गया है,लेकिन मध्य प्रदेश में बसों के पहिए अब भी लॉक हैं। लॉकडाउन के कारण मध्यप्रदेश में बंद की गयीं बसें दोबारा शुरू करने के बारे में सरकार अभी तक कोई फैसला नहीं ले पायी है। बस ऑपरेटर्स की भी अपनी कई मांग हैं लेकिन कई दौर की मीटिंग के बाद भी उन पर फैसला नहीं हो पाया है।  पूरे प्रदेश में बसें स्टैंड पर खड़ी हुई हैं.हजारों यात्री बसों के पहिए थमने की वजह से ड्राइवर,क्लीनर और कंडक्टर के सामने रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हुआ है और यात्री परेशान हैं.
परिवहन विभाग और प्रदेश के बस ऑपरेटरों के बीच कई दौर की मीटिंग हो चुकी है। इसके बावजूद कोई रास्ता नहीं निकला है। अभी भी सिर्फ बातचीत से खानापूर्ति हो रही है। बस ऑपरेटरों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं उन पर सरकार को अंतिम फैसला लेना है। ऑपरेटर्स का कहना है सरकार को 3 महीनों का टैक्स माफ कर देना चाहिए और किराया भी बढ़ाना चाहिए। उन्होंने किराया बढ़ाने को लेकर तर्क दिया है कि सरकार ने यात्री बसों में 50 फीसदी यात्रियों को मंजूरी दी है, इसलिए हम अपने नुकसान की भरपायी कैसे कर पाएंगे। ऊपर से तीन महीने से बसें बंद हैं तो जो नुकसान हुआ है वो अलग। अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो फिर 50 फीसदी यात्रियों के साथ बसें नहीं चलायी जा सकतीं। प्रदेश में बसें बंद होने के कारण 60 हजार ड्राइवरों और 90 हजार कंडक्टर-क्लीनर बेरोजगार हो गए हैं। एक बस के जरिए दो ड्राइवर और 3 से ज्यादा कंडक्टर, क्लीनर का रोजगार चलता है। इसके साथ ही बसों की रिपेयरिंग, उनकी डेंटिंग-पेंटिंग के साथ उसकी आयल ग्रेसिंग करने से जुड़े लोगों को भी रोजगार मिलता है। बसों से जुड़ा व्यापार भी होता है। कई व्यापारियों कारोबारी का बिजनेस बस से ही होता है।