संयम की साधना व गुरू भक्ति सफलता का मार्ग- जैन मुनिश्री

Jun 10 2020

ग्वालियर। संयम की साधना व गुरु भक्ति से जीवन में सभी सफलताएं प्राप्त की जा सकती है। संयम, साधना व गुरु भक्ति के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा है। मनुष्य जीवन में संस्कारों का भी बहुत बड़ा प्रभाव होता है। संयम साधना व गुरु भक्ति ही संस्कार सिखाती है। अच्छे संस्कार ही मनुष्य को उन्नति के पथ पर ले जाते हैं। यह बात मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने बुधवार को हरिशंकर पुरम स्थित महेश जैन गुरुभक्त के निवास पर धर्मचर्चा करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज भी मौजूद थे।
 मुनिश्री ने कहा कि आज हर व्यक्ति प्रशंसा का भूखा है, वैसे देखा जाए तो प्रशंसा जो पचा नहीं पाते, वह प्रशंसा सुनकर अहंकार में चूर-चूर हो जाते है। दूसरा संदेश है लोभ, लालच से अपनी रक्षा करो। लोभ, लालच में आकर व्यक्ति क्या-क्या नहीं करता, पद का लोभ, धन का लोभ आदि अनेको लोभ है जिनके कारण व्यक्ति का जीवन बर्बाद हो जाता है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ओर मुनिश्री विजयेश सागर महाराज हरिशंकर पुरम में गुरुभक्त महेशचंद जैन के निजनिवास पर विराजमान है। मुनिश्री प्रतिदिन प्रात:  ध्यान स्वाध्याय 8-30 बजे धर्म चर्चा ऑनलाइन 10-30 बजे आहारचर्या ओर दोपहर में प्रतिक्रमण और शाम को 6-30 से गुरु भक्ति आरती होती है।