विश्व पर्यावरण दिवस पर बेबीनार पर आनलाइन आयोजित की चित्रकला प्रतियोगिता

Jun 06 2020

विश्व पर्यावरण दिवस पर में  बच्चों के साथ चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की जिसमें बाल अधिकार फार्म से जुडे बच्चे और दूसरों ने भाग लिया। श्रीप्रकाश सिंह निमराजे अध्यक्ष, गोपाल किरन समाज सेवी संस्था, ग्वालियर ने सभी से प्रार्थना  कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए व औरों को भी ऐसा करने के लिये प्रोत्साहित करे क्योंकि यह पेड़ पौधे ओर वन ही है जो मानव और पशु पक्षियों के जीवन का आधार है आज हमारी बढ़ती आबादी, जरूरतों और महत्वकांक्षो के चलते इन्हें लगातार नष्ट किया जा रहा है ये जंगली जानवरों के रहने का आवास हैं जिनके नष्ट होने के कारण वे शहर में आने लगे जिससे उनकी जान को तो खतरा उत्पन साथ ही हमारा जीवन भी संकट में आ गया है। कल्पना कीजिये यदि कोई हमारे घर मे अचानक घुस आए तो हमे कितना डर लगेगा ठीक वैसा ही डर उनको भी लगता हैं तो वो उस डर के कारण हम पर हमला कर देते हैं। आज कई जानवरो ओर पशु पक्षियों की जाति प्रजाति विलुप्ति की कगार पर खड़ी है और कुछ तो विलुप्त भी हो गयी है। इसका एक और कारण यह भी है कि हमने सारे प्राकृतिक जल, वायु और भूमि संसाधनों को दूषित कर दिया है या वे बहुत सीमित बचे हुए है। जो हमारे जन   जीवन और स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी ठीक नही है। मनुष्य ने अपने स्वार्थ ओर सुख सुविधा के लिए प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर उसके चक्र को अनियंत्रित किया है जिसका परिणाम बाढ़, महामारी, आंधी, तूफान, ग्लोवल वार्निंग, तेजी से बर्फ का पिघलना आदि हैं।
विश्व पर्यावरण पर हम सबको इस बात पर विचार करना चाहिए कि हमारे बड़े बुजुर्ग किस प्राकृतिक संसाधनों के साथ पलकर बड़े हुए और हमारे पास उनके आधे भी नही है और हमने अभी इस पर विराम नही लगाया तो हमारे आने वाली पीढ़ी के पास क्या बचेगा व उन्हें इसके किन किन दुष्परिणामो से गुजरना पड़ेगा पहले हमारे बड़े बुजुर्ग 100 साल तक जीवन व्यतीत कर लेते थे। फिर उनकी अगली पीढ़ी 80 साल तक जी पाई फिर उनकी अगली 60 साल तक बस अब 40 साल में दम तोड़ रही हैं आप अपनी आगे आने वाली पीढ़ी के बारे में विचार करें क्या वो अपने जीवन और परिवार की खुशियों को कितना महसूस कर पाएंगे। यदि आप अगर मेरी बात से सहमत हैं तो हमारे साथ ज्यादा नह एक छोटा सा प्रयास करें
आपको पता है पक्षी जो फल खाते है उनके बीजो को अपने बीट के जरिये पूरे जंगल में फैला देते हैं जिससे जब बारिश होती हैं तो वहां पेड़ पौधे उग जाते है यदि हम अपने दैनिक जीवन में काम आने वाले फल और सब्जियों के बीजो को इक_ा कर उन्हें सुखाकर उन्हें मिट्टी में मिलाकर उनकी बॉलस बनाकर उन्हें मिट्टी के नीचे दवाएं या ऐसे ही जंगलों में सफर करते वक्त फेक दे तो वहाँ भी पेड़ उग जाएंगे।
आप इस मिट्टी में अपने आंगन की सूखी पत्तियां, नारियल की जटा का पावडर, बची चाय की पत्ती, गोबर के सूखे कंडे, राख, खाद आदि चीजे भी अगर मिलाकर बॉल्स बनाएंगे तो परिणाम और भी बेहतर और सफल होगा। एस.एल.अटारिया जी ने संस्था के साथ जुड़कर संस्था के प्रयासों की सराहना की। सभी का एक छोटा सा प्रयास पर्यावरण को बचाने में सार्थक साबित हो सकता है।