निर्जला एकादशी पर भक्तों ने मंदिरों में किए दर्शन

Jun 02 2020

ग्वालियर। लॉकडाउन के पांचवें चरण में धार्मिक स्थलों को खुलने की अनुमति अब तक नहीं मिली है लेकिन मंगलवार को सुबह मंदिरों के पट भक्तों की भावना को देखते हुए खुल गए। सुबह होते ही सैकड़ों भक्तों ने मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की।
सूरज के तेवर आज थोड़े नरम होने से महिलाओं को राहत है।  मंगलवार को भौर होते ही महिलाओं ने अन्न-जल का त्याग कर भगवान की आराधना करते हुए निर्जला ग्यारस का व्रत शुरू कर दिया। मंदिरों में ताले लगे थे, लेकिन जैसे ही भक्तों की भीड़ बढ़ती गई तो प्रबंधन ने भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए भक्तों की भावना का ध्यान रखते हुए पट खोल दिए। महिलाएं भजन-कीर्तन कर दान, पुण्य किया। व्रतधारी खुद पसीने से तरबतर हैं लेकिन भगवान को गर्मी न लगे इसके लिए हाथ के पंखे से हवा करते हुए सतुआ और आम का भोग लगाकर मटकी व सुरई में पानी भरकर दान किया।  हमारे धर्म ग्रंथों में निर्जला ग्यारस की उपासना कर सीधा स पर्क एक ओर पानी त्यागने से है तो वहीं दूसरी ओर आमजन को पानी पिलाकर परोपकार की प्राचीन पर परा भी है। मंगलवार को निर्जला ग्यारस पर महिलाएं अन्न, जल का त्याग किए थीं।
 निर्जला ग्यारस का व्रत सूर्योदय से शुरू होता है लेकिन सूर्यास्त तक नहीं बल्कि दूसरे दिन द्वादशी पर खत्म होता है। पूरे एक दिन और एक रात इस भीषण गर्मी में उपासना करते हुए श्रद्धालु बिना पानी के रहते हुए उपासना करते हैं।  पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु यह पांच तत्वों से मानवदेह निर्मित होती है। पांच तत्वों को अपने अनुकूल बनाने की साधना प्राचीनकाल से चली आ रही है, निर्जला एकादशी अन्नमय कोश की साधना से आगे जलमय कोश की साधना का पर्व है, पांचों तत्व की साधना को योग दर्शन में गंभीरता से बताया गया है। निर्जला एकादशी पर मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रही और भक्तों ने दान पुण्य करते हुए खुशहाली की कामना की।
सुबह से हुए भजन-कीर्तन
आज सुबह से ही भाऊ का बाजार स्थित गंगा मंदिर में भी भक्तों ने पहुंचकर अन्न, जल का त्याग करते हुए पूजा अर्चना शुरू की तो वहीं महिलाएं ढोलक की थाप पर भजन गा रही थीं। सनातन धर्म मंदिर में महिलाओं की भीड़ लगी हुई है तो वहीं राम मंदिर पर भी भगवान श्रीराम और माता सीता के दर्शन करते हुए परिवार की खुशहाली और पति की दीर्घायु के लिए कामना करते हुए दान-पुण्य किया जा रहा है।