नाप लेने के लिए पास आना मजबूरी : दुकानदार

May 21 2020

ग्वालियर। कोरोना वायरस जैसी महामारी से बचने के लिए ग्राहकों से दूरी बनाने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन जब तक कुर्ता- पजामा सिलने के लिए शरीर का नाप नहीं लेंगे तो कैसे सिलेंगे। यह दर्द उन टेलरों का है जो कुर्ता-पजामा सिलने का काम करते हैं या फिर बेचते हैं। यही हाल चूड़ी कारोबारियों का है। इन कारोबारियों का कहना है कि चूड़ी का नाप लेने के लिए हाथ तो पकडऩा मजबूरी है। ईद का त्योहार नजदीक आता जा रहा है और ईद के पर्व पर हर वर्ष करोड़ों रुपए का कारोबार हो जाता है लेकिन इस बार ईद पर शटर डाउन रहने के कारण व्यापारियों में मायूसी छाई थी तो खरीदार भी इस बात को लेकर हैरान थे कि बाजार खुलेगा या नहीं। प्रशासन द्वारा शर्तों के साथ बाजार खुलने की अनुमति दे दी गई है, जिससे कारोबारियों को उ मीद है कि चार- पांच दिन में अच्छा कारोबार हो जाएगा, लेकिन उनकी परेशानी यह है कि जब तक शरीर का नाप नहीं लेंगे तो कपड़े कैसे सिलेंगे और बेचेंगे। चूड़ी कारोबारियों का कहना है कि चूड़ी और कंगन कई साइज के आते हैं। कई बार महिलाओं के साथ में चूड़ी नहीं चढ़ती है तो हाथ पकड़कर पहनाना पड़ती है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होना मुश्किल है।
माल जुटाना टेढ़ी खीर
ईद पर सबसे ज्यादा चूड़ी और कंगनों की मांग रहती है और यह फिरोजाबाद से आते हैं। चूड़ी कारोबारियों का कहना है कि ईद को लेकर माल मंगाया जाता उससे पहले ही लॉकडाउन लग गया और अब माल नहीं आ पा रहा है। ईद का त्योहार चार दिन बाद है और ऐसे में माल बाहर से आना और तैयार होना टेढ़ी खीर है। जो सामान दुकान में पहले से रखा है उसी को बेचकर सब्र करना होगा। चूड़ी कारोबारियों का कहना है कि ईद पर हर साल करोड़ों रुपए का कारोबार होता है। एक दिन में ही 70 से 80 हजार रुपए की बिक्री होती है। लेकिन इस बार मामला ठंडा रहा।     
कुर्ते-पजामे रेडीमेड तैयार
ईद पर अल्लाह-ताला की बारगाह में पहुंचकर अमन और चैन के लिए दुआ मांगी जाती है और इसके लिए अधिकतर लोग सफेद और रंगीन कुर्ते पजामे खरीदते हैं, दर्जी की दुकानें बंद रहने के कारण माल की पूर्ति होना मुश्किल है, लेकिन दुकानदारों का कहना है कि ईद को देखते हुए पहले से ही रेडीमेड कुर्ते और पजामे मंगवा लिए हैं। नजरबाग मार्केट में रेडीमेड कपड़ा कारोबारियों कहना है कि ईद के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक के लिए कुर्ते-पजामे हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे हो इसको लेकर परेशानी है। क्योंकि कुर्ते-पजामे कई बार नाप के लिए पहनाना पड़ते हैं।
अब नहीं कारोबार की उ मीद
हेमराज मार्केट में कपड़ों का काम करने वालों का कहना है कि ईद पर सबसे ज्यादा कुर्ते पजामे के लिए कपड़े की बिक्री होती है और कुर्ता-पजामा सिलने वाले टेलरों को भी काम मिलता है। क्योंकि अधिकतर लोग रेडीमेड कुर्ते-पजामे खरीदने के बजाय सिलवाकर पहनते हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते शटर डाउन रहने से कारोबार भी ठप रहा। अब उ मीद लगाना मुश्किल है, क्योंकि इतने कम समय में सिल नहीं पाएंगे।                         
क्या कहते हैं टेलर
कुर्ता-पजामा सिलने वाले इशाक मोह मद का कहना है कि जब तक नाप नहीं लेंगे तो कुर्ता-पजामा कैसे सिलकर देंगे। लॉकडाउन के चलते पहले से ही शटर डाउन हैं और अब शटर उठे भी हैं तो प्रशासन द्वारा कहा गया है कि ग्राहकों से दूरी बनाकर रखना है, इससे तो बेहतर है कि हम दुकान ही नहीं खोलें। सराफा बाजार में फिटवेल टेलर्स के अमित अग्रवाल का कहना है कि कोरोना महामारी से बचने के लिए उन्होंने सिलाई का काम ही बंद कर दिया है। अब तो केवल कपड़ा बेचेंगे।
पहनते हैं नए कपड़े
सन्नी पठान ने बताया कि रमजान के दौरान पांचों वक्त की नमाज और तराबी पढ़ी जा रही हैं। आज अलविदा जुमा पर जो लोग रोजा रखते हैं वह नए कपड़े पहनते हैं, जिसमें शरीर पर कोई भी पुराना व नहीं रहता। ईद के दिन भी नए कपड़े पहने जाते हैं। आज अलविदा जुमा के लिए आज बाजार में कपड़ों के साथ-साथ अंडरगारमेंट की खरीदारी भी हो रही है।