हलवाईयों की दुकाने खुलने से पहले बढ़ी तेल-शक्कर की मांग

May 20 2020

ग्वालियर। दाल बाजार में बुधवार को शक्कर और रिफाइंड तेल के साथ-साथ रवा, मैदा की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही थी। शक्कर की दुकानों के शटर खुलते ही खरीदार भी पहुंच गए और एक साथ 12 से 15 बोरियां ले जा रहे थे। दाल बाजार में थोक कारोबारियों के लिए दुकानों के शटर खुले हुए हैं और सबसे ज्यादा खरीदारी करने के लिए हलवाई और नाश्ते का काम करने वाले दुकानदार पहुंच रहे हैं। लॉकडाउन के चलते शक्कर, तेल, रवा मैंदा और आटे के दाम कम हैं लेकिन लॉकडाउन के चौथे चरण में दुकानें खुलने के बाद इनके दाम बढऩे की उ मीद बनी हुई है, ऐसा व्यापारियों का भी मानना है। लॉकडाउन के चलते पिछले 2 माह से मिठाइयों की दुकानें बंद हैं और नाश्ता बेचने वाले छोटे-बड़े कारोबारी अपना कारोबार बंद करके बैठे हैं जिससे शक्कर, रवा, मैंदा और रिफाइंड के साथ-साथ आटे की खपत कम हो रही थी और आवक ज्यादा, जिससे इनके दाम भी स्थिर थे। लॉकडाउन से पहले शक्कर 38 रुपए और रिफाइंड तेल का पैकेट 110 रुपए में बिक रहा था लेकिन लॉकडाउन के चलते शक्कर 34 रुपए और रिफाइंड 90 रुपए बिक रहा है। 
यही हाल आटा, रवा, मैंदा का है। हलवाइयों की दुकानें खुलने के बाद मिठाई बनना शुरू हो जाएगी जिससे शक्कर की खपत बढ़ेगी। इसके साथ ही हलवाईयों की दुकान खुलने से मावा और दूध की मांग भी बढ़ेगी।                
दाल बाजार में कई बार लगा जाम
दाल बाजार में दो दिन बाद थोक बाजार खुलने से बुधवार को  अच्छी खासी भीड़ लगी हुई थी और खरीदारी करने के लिए लोग सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गए थे। सोमवार को थोक कारोबार होना था लेकिन आगजनी की घटना के बाद कारोबारियों ने शटर डाउन कर दिए थे। दाल बाजार में पुलिस व्यवस्था बनाती रही लेकिन इसके बाद भी जाम से राहत नहीं मिली।                   
क्या कहते हैं कारोबारी
खोये का कारोबार करने वालों का  कहना है कि लॉकडाउन के चलते पिछले 2 माह से हलवाइयों की शटर डाउन है तो मावे की बिक्री होने का प्रश्न ही नहीं है।  दो माह में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है क्योंकि इस दो माह में सहालग रहता है और मावे की सबसे ज्यादा डिमांड होती है। वहीं शक्कर कारोबारियों का कहना है कि सामान्य दिनों में जो कारोबार होता है वह लॉकडाउन के चलते नहीं हुआ। पहले चरण में कारोबार ठीक रहा लेकिन इसके बाद शक्कर की डिमांड कम हो गई और दाम भी नीचे आ गए। हलवाइयों की दुकान ाुलने से अब उ मीद बनी है। दूध कारोबारियों का कहना है कि दूध के खरीदार नहीं मिल रहे हैं क्योंकि छैने की मिठाई सबसे ज्यादा बनती है लेकिन दुकानें बंद रहने से दूध की बिक्री नहीं हो रही है। सुबह 3 घंटे मिलते हैं उसमें सिर्फ वही दूध ले जाते हैं, जिन्हें घर में जरूरत है। शाम को दूध नहीं आ पा रहा है जिससे किसान, व्यापारी दोनों को नुकसान हो रहा है।