लॉकडाउन में सब्जियों के दाम गिरे

May 17 2020

ग्वालियर। पांच माह पहले थोक में 90 रुपए प्रतिकिलो बिकने वाला प्याज 6 से 7 रुपए प्रतिकिलो तक बिक रहा है। दाम इतने कम हो गए हैं कि किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। इससे नुकसान हो रहा है। रविवार थोक मंडी में प्याज आज 6 रुपए प्रतिकिलो रहे। चूंकि उत्पादन ज्यादा है। इससे बारिश तक प्याज के दाम कम ही रहेंगे और आपको आगे सस्ता ही प्याज मिलेगा।
शहर की लक्ष्मीगंज स्थित थोक सब्जी मंडी में प्याज एवं लहसुन दिसंबर में थोक में 90 से 94 रुपए प्रतिकिलो बिक रहा था। वो अब शहर में स्थापित सब्जी मंडियों में 6 रुपए प्रतिकिलो बिक रहा है। यही नहीं इसके भाव लगातार कम होते जा रहे है। स्थिति यह है कि किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है।              
इसलिए घट रहे प्याज के दाम 
प्याज का उत्पादन इस वर्ष अधिक हुआ है। पिछले वर्ष दाम अधिक होने से कई लोगों ने प्याज का उत्पादन किया है। लॉकडाउन के चलते प्याज की आवक बढ़ गई है और बाहर नहीं जा पा रही है। बारिश के पहले देश के अधिकांश हिस्सों में प्याज का उत्पादन होता है। प्रदेश के साथ पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र में प्याज का बंपर उत्पादन है। उत्पादन ज्यादा होने से दाम गिर रहे हैं। वहीं Óयादातर किसानों के पास प्याज का भंडारण करने की जगह नहीं है। प्याज जल्दी सड़ती है। ऐसे में किसान मंडी में बेचने पहुंच रहे हैं। इससे भाव गिर रहे हैं।               
सभी सब्जियों के भाव कम हुए
गर्मी के इस मौसम में सब्जियों के तेवर हर वर्ष चढ़े रहते थे और हरी सब्जियां आसमान छूती नजर आती थीं। गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा धनिया, पोदिना, नींबू, भिंडी, लौकी, तुरई के दाम आसमान पर ही रहते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते इस वर्ष आधे भी नहीं हैं। पिछले वर्ष की अगर बात करें तो भिंडी, तुरई 40 से 50 रुपए किलो बिक रही थी जो इन दिनों बाजार में 20 रुपए किलो में मिल रहा है। धनिया 100 के पार पहुंच जाता था लेकिन अभी 20 रुपए किलो मिल रहा है, यही हाल हरी मिर्च का है।                     
टमाटर, प्याज और हरी सब्जियों के दामों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। आलू को अगर छोड़ दें तो सभी सब्जियों के दाम 30 से 40 रुपए किलो से ज्यादा नहीं हैं। अधिकतर सब्जी 15 से 20 रुपए किलो तक में मिल रही हैं। इसकी मु य वजह यह है कि महाराष्ट्र, इंदौर, उत्तरप्रदेश से आने वाली सब्जियां आ तो रही हैं लेकिन यहां कहीं बाहर नहीं जा पा रही हैं, क्योंकि वहां लॉकडाउन के चलते मंडियां अधिकतर बंद हैं। दूसरी वजह यह है कि प्रशासन ने जगह- जगह सब्जी मंडी लगवा दी हैं और तीसरी वजह यह हैं कि जो लोग चाट, पकोड़ी का काम करते थे और जो मेहनत मजदूरी करते थे वह भी सब्जी का ठेला लगा रहे हैं। इसलिए ठेलों की सं या भी बढ़ गई है और हर गली-बाजार में सब्जी ही सब्जी नजर आ रही हैं।            
लॉकडाउन से पहले टमाटर के दाम आसमान छू रहे थे और 40 से 45 रुपए किलो थोक में टमाटर बिक रहा था। लॉकडाउन के बाद टमाटर के दामों में निरंतर गिरावट आ गई है। टमाटर का उत्पादन भी अधिक हो रहा है और बाहर की मंडियों में टमाटर नहीं जा पा रहा है, जिस कारण टमाटर के दामों में अच्छी खासी गिरावट आ गई है। थोक मंडी में टमाटर 6 से 7 रुपए किलो बिक रहा है। किसानों का कहना है कि इस भाव में भी खरीदार नहीं मिलने के कारण पशुओं को खिलाना पड़ रहा है।