घर जाने के लिए कोई पैदल तो कोई वाहनों का ले रहा सहारा

May 15 2020

ग्वालियर। जान जोखिम में डाल बेबसी का सफर पर घर पहुंचने की मुस्कान यह नजारा इन दिनों आगरा-मुंबई नेशनल हाइवे पर देखा जा सकता है। सरपट दौड़ते ट्रक और लोडिंग वाहन लेकिन उनमें सामान नहीं, भेड़, बकरियों की तरह ठुंसे लोग हैं, जिसे जो वाहन मिल रहा है वह उसमें सवार होकर अपने घर पहुंचना चाह रहा है। कई लोग पैदल हजारों किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं तो कई लोग ट्रकों और ट्रॉलों में भेड़-बकरियों की तरह बैठकर सफर करने को मजबूर दिख रहा है। इस भीषण गर्मी में पसीने से तरबतर हैं लेकिन इन्हें इसकी चिंता करने के बजाए घर पहुंचने की खुशी झलक रही है। पुरानी छावनी नेशनल हाइवे पर हमनें जब जाकर देखा तो ट्रकों में लोग भरे हुए थे और बंद ट्रॉले में माल की जगह इंसान बैठे थे। एक घंटे में लगभग एक सैकड़ा से ज्यादा वाहन गुजरे जिसमें 22 ट्रक, 5 ट्रॉले, 18 मैजिक और 7 ऑटो के अलावा दुपहिया वाहन थे। हर किसी का मकसद एक था, जैसे-तैसे घर पहुंच जाएं।
अधिकांश लोग वह हैं जो मजदूरी करते हैं और उन्हें घर पहुंचने के लिए कोई सुविधा नहीं मिली है, तो कई लोग इस बात को लेकर हैरान दिखे कि न तो पीने का पानी मिल पा रहा है और न ही भूख मिटाने के लिए भोजन, ढाबों पर ताले लटके हैं और इस गर्मी में वाहनों में पसीने से सफर करते हुए तरबतर हो रहे हैं।
दो बार बिगड़ी तबीयत तो रखी पट्टी
ट्रक में सफर कर रहीं देवकी के साथ दो बच्चे भी हैं, देवकी के बेटे की तबीयत रास्ते में खराब हो गई, देवकी का कहना था कि वह नोएडा में मजदूरी करती थीं लेकिन फैक्ट्री बंद हो गई और खाने के लाले पडऩे लगे तो घर जाने की ठान ली। रास्ते में बेटे की तबीयत दो बार बिगड़ी, लेकिन कोई अस्पताल नहीं मिला तो ठंडे पानी की पट्टी रखी जिससे आराम मिल गया, ट्रक में साड़ी का झूला बनाकर उसे सुलाना पड़ा।                  
लॉकडाउन में ही खरीदी बाइक
राजस्थान के तिजारा में होटल चलाने वाले दीपक कुमार झांसी के निवासी हैं। लॉकडाउन के चलते जैन तीर्थस्थल पर कोई नहीं आ रहा है और होटल का शटर डाउन है। जो जमा पूंजी थी उसे धीरे-धीरे खर्च कर रहे हैं। माता-पिता और परिवार के सदस्यों को तो ट्रक से झांसी के लिए रवाना कर दिया और कुछ दिन लॉकडाउन खुलने का इंतजार किया, लेकिन जब कोई उ मीद नहीं दिख रही तो मित्र के जरिए नई बाइक लॉकडाउन में खरीदी अब उससे ही घर जा रहा हूं।                  
कभी नहीं भूलेंगे यह सफर
रामसेवक हरियाणा में रहकर मजदूरी करता था और लॉकडाउन के चलते वह अपने घर तक नहीं पहुंच पा रहा था। रामसेवक एक्टिवा से अपने परिवार के साथ घर पहुंचने के लिए 6 दिन पहले निकला था। रामसेवक का कहना था कि वह अपने गृह नगर कानपुर जा रहा है। टैक्सी वालों से पूछा तो वह जाने के लिए तैयार नहीं हुए और मनमाना किराया मांग रहे थे। अपने दोनों बच्चों और पत्नी के साथ एक्टिवा से ही निकल पड़ा। रास्ते में परेशानी तो हुई लेकिन घर पहुंचने की खुशी है।