52 दिन बाद सोना-चांदी कारोबारियों ने की दुकानों की सफाई

May 13 2020

ग्वालियर। सहालग के सीजन में सोने-चांदी की मांग सबसे ज्यादा रहती है, लेकिन लॉकडाउन के चलते व्यापारियों को अपने शटर डाउन करना पड़े। मई माह में सबसे ज्यादा सहालग रहता है, लेकिन इस वर्ष शादियां नहीं होने से व्यापारियों को मायूस रहना पड़ा। दुकानों में रखा सोना-चांदी के जेवर की देखरेख करने और जमी धूल को साफ करने के लिए प्रशासन ने बुधवार सुबह अनुमति दी थी। प्रशासन की अनुमति मिलते ही सराफा कारोबारी सुबह सात बजे ही अपनी दुकानों पर पहुंचे और कर्मचारियों को बुलाकर आठ बजते ही 52 दिन से बंद शटरों को साफ कराकर उठवाया।
सराफा बाजार में सोना-चांदी कारोबारियों के शटर लगभग 52 दिन से डाउन हैं। जनता क र्यू के साथ ही कारोबारियों ने अपने शटर डाउन कर दिए और इसके बाद यह लॉकडाउन टू तक नहीं उठे, प्रशासन ने कैट और सोना-चांदी कारोबारियों की मांग पर लॉकडाउन थ्री में राहत देते हुए साफ-सफाई के लिए शटर उठाने की अनुमति व्यापारियों को दी है। आज बुधवार को चार घंटे का समय दिया है, जिसके चलते कारोबारी सुबह होते ही अपनी दुकानों पर पहुंच गए। व्यापारियों ने शटर उठाने के बाद दुकानों की साफ- सफाई शुरू कर दी। जिससे आज सराफा बाजार में रौनक तो दिखाई दे रही है,लेकिन कारोबारियों ने कारोबार नहीं किया। लॉकडाउन के चलते दुकानों पर ग्राहक भी नहीं पहुंचे।                
 लॉकडाउन में सोना हुआ महंगा
लॉकडाउन के चलते दुकानों के शटर डाउन हैं और कई परिवारों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गरीबों का पेट मददगारों से भर रहा है, लेकिन मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा परेशान हैं। ऐसे में सोने-चांदी के दाम कम होने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं। सोना-चांदी एसोसिएशन के अध्यक्ष पुरुषोत्तम जैन ने बताया कि 25 मार्च को लॉकडाउन लगा था, उस समय स्टेण्डर्ड सोने के दाम 41 हजार रुपए थे और आज सोने के दाम 46 हजार 700 पर पहुंच गए हैं। वहीं जेवराती सोना लॉकडाउन शुरु होने पर 39 हजार का 10 ग्राम था जो अब 43 हजार पर पहुंच गया है। चांदी के दाम 37 हजार रुपए किलो पर बंद हुए थे और आज जब दुकान साफ-सफाई के लिए खोली तो इसके दाम 43 हजार रुपए हैं।                      
आभूषण रखे हैं तैयार
सोना-चांदी कारोबारियों का कहना है कि अप्रैल और मई माह में सहालग के चलते कई लोगों ने पहले से ही बुकिंग करा ली थी और उनके जेवर तैयार कर रख लिए थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते दुकानों के शटर डाउन होने से डिलेवरी नहीं दे सके, तो वहीं कई लोगों ने विवाह समारोह को निरस्त कर आगे बढ़ा दिया। सोना-चांदी कारोबारियों का कहना है कि पिछले 54 दिनों में करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है।
जूता, कपड़ा कारोबारियों को आस
बंद दुकानों में रखे जूते और कपड़े खराब हो रहे हैं और इसके लिए वह प्रशासनिक अधिकारियों से भी गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। नया बाजार में कपड़ा कारोबारियों को साफ- सफाई करने के लिए प्रशासन ने समय दिया था और बुधवार को सोना-चांदी कारोबारियों को समय दिया गया है।
अब टोपी बाजार सहित अन्य बाजारों के जूता कारोबारी और रेडिमेड कपड़ों का कारोबार करने वाले कपड़ा कारोबारी भी प्रशासन से आस लगाए बैठे हैं कि उन्हें भी साफ-सफाई के लिए दुकानों के शटर खोलने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए कैट के अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने व्यापारियों के साथ मिलकर प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा भी है।                  
प्रशासन ने कई चीजों पर अब भी प्रतिबंध लगा रखा है लेकिन कारोबारी अपना कारोबार बेधड़क होकर कर रहे हैं और यह कारोबारी दुकानों के बाहर बैठकर ग्राहकों का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। जैसे ही ग्राहक आता है तो कारोबारी अपना शटर उठा देते हैं। कुछ ने तो आधा शटर डाउन कर कारोबार करना शुरू कर दिया है। ऑटो मोबाइल सेक्टर को एक दिन की अनुमति दी गई थी और इसके बाद अनुमति नहीं है, लेकिन वाहन सुधारने वालों से लेकर पाटर््स बेचने वाले दुकानों के बाहर भीड़ लगवा रहे हैं और गाड़ी रिपेयर का काम कर रहे हैं।