रात-दिन कोरोना को हराने सड़कों पर पुलिस, सामाजिक छवि हुई मजबूत
May 12 2020
ग्वालियर। कोरोना महामारी के चलते आज हम सभी घरों पर हैं और आज हमें बचाने सड़क पर जो नजर आ रही वह है पुलिस। धूप हो या रात का अंधेरा, पुलिस सड़क पर कोरोना के खिलाफ संघर्ष करती नजर आ रही है। कोरोना के संक्रमण से हम आप सभी को बचाने के लिए पुलिसकर्मी डेढ़ माह से तेज धूप में डटे हुए हैं। धूप से बचने के लिए इनके पास कोई विशेष इंतजाम नहीं है, क्योंकि बेवजह सड़क पर निकलने वाले लोगों को सड़क पर रोकने के लिए इनको तेज धूप में बीच सड़क पर ड््यूटी करनी पड़ रही है। पुलिस के साथ ही डॉक्टर व जिला प्रशासन भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। यही कारण है कि पुलिस को आमजन की तारीफ मिल रही है।
अभी तक जब भी पुलिस का जिक्र होता था तो नकारात्मक रूप में ही होता था। पर कोरोना महामारी ने पुलिस शब्द की परिभाषा ही बदल दी। किसी ने सोचा नहीं होगा कि बदमाशों के एनकाउंटर करने वाली पुलिस जरूरत आने पर लोगों के घरों तक राशन, सब्जी और दवा पहुंचाएगी। पिछले 50 दिन में पुलिस की 50 साल पुरानी नकारात्मक छवि को धूमिल कर सामाजिक छवि को जन्म दिया है। जहां जरूरत पड़ी वहां पर लोगों को हाथ जोड़कर समझाया और जो नहीं माना उसे स ती से समझाइश दी।
18-18 घंटे ड्यूटी, अपनों से दूर
आमजन की सुरक्षा में जुटे पुलिस जवान, अफसर इस मुसीबत की घड़ी में अपनों से दूर सड़कों पर आमजन की सेवा में खड़े हैं। जनता सुरक्षित रहे इसके लिए पुलिस जवान और अफसर 18-18 घंटे ड्यूटी के बाद जब घर पहुंचते हैं तो अलग रूम में सोते हैं। सुबह वहीं से नाश्ता कर फिर कर्तव्य पर निकल पड़ते हंै। जब से कोरोना का कहर आया है यह जवान व अफसर अपने परिजनों से दूर हैं कहीं उससे वे संक्रमित ना हो जाएं।
डॉक्टर भी नहीं पीछे
पुलिस के साथ ही डॉक्टरों की टीम भी पीछे नहीं है। जिस तरह कोरोना संक्रमित व्यक्ति से सीधा पाला पुलिस का पड़ता है उसी तरह संक्रमित का उपचार और उनकी देखरेख की जि मेदारी डॉक्टरों की टीम पर है। डॉक्टरों की टीम भी दिन-रात इन मरीजों का उपचार करने के साथ ही लगातार जांच में जुटे हुए हैं। इन योद्धाओं के साहस से ही कोरोना संक्रमण की चपेट में आए छह मरीज ठीक होकर अपने घरों के लिए वापस लौट चुके हैं।
लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए शहर के चौराहों से लेकर गली व मोहल्ले में ड्यूटी दे रहे जवान व अफसर हर तरह का जतन कर रहे हैं, जिसे प्यार से समझ आता है उसे प्यार की भाषा में और जिसे डंडे की भाषा समझ आ रही है, उसे डंडे से समझाया जा रहा है। लोगों को समझाइश देने के लिए कभी बिजुका लगाया तो कभी गाने गाकर समझाया।
लॉकडाउन के चलते घरों में रहकर कोरोना से लड़ाई लडऩे वाले शहरवासियों की मदद पुलिस हर स्तर पर कर रही है। इस बीच एक सैकड़ा से अधिक गंभीर रोगियों के लिए दवा पहुंचाकर उनकी जान ही नहीं बचाई, बल्कि कई स्थानों पर भूख से परेशान लोगों तक राशन भी पहुंचाया है। जो क्राइम ब्रांच बड़े-बड़े बदमाशों के पीछे लगी रहती थी, वह भी अब इस संघर्ष की लड़ाई में अपना योगदान दे रही है और शहरवासियों के लिए ऑनलाइन राशन पहुंचाने की व्यवस्था संभाले है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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