स्पेशल श्रमिक ट्रेन से नासिक से लौटे प्रवासी मजदूर

May 11 2020

ग्वालियर। अपने ही गांव में बंटाई पर खेतों में मजदूरी व गांव में ही छोटा- मोटा कारोबार कर लूंगा, लेकिन अब भूलकर भी मजदूरी करने परदेश नहीं जाऊंगा। यह बात मुंबई के उल्हासनगर में कपड़ा फैक्ट्री में मजदूरी करने वाले रामसिंह गुर्जर ने कही। ये श्रमिक स्पेशल ट्रेन अंचल के दस जिलों में रहने वाले 849 श्रमिकों को लेकर सोमवार को नासिक  से ग्वालियर पहुंची।
ग्वालियर पहुंचे सभी श्रमिकों को उनके परिवार के साथ स्टेशन पर ही थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद सर्कु लेटिंग एरिया में खड़ी बसों में सवार कर उनके संबंधित कस्बों के लिए पुलिसकी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया गया। लॉकडाउन के चलते मु बई महाराष्ट्र में फंसे अंचल के मजदूरों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन सुबह नासिक से ग्वालियर पहुंची। इस श्रमिक स्पेशल ट्रेन की 24 बोगियों में 849 श्रमिक के अलावा अलग-अलग कारणों से मु बई में फंसे लोग वापस ग्वालियर लौटे।
मां का स्वर्गवास हो गया चेहरा भी नहीं देख पाया
प्रहलाद कुमार ने बताया कि उसकी मां का बीस अप्रैल को देहांत हो गया था। लॉकडाउन में फंसे होने के कारण आखिरी बार मां का चेहरा ाी नहीं देख पाया। यह दुख मुझे जिंदगी भर कचोटता रहेगा। लॉकडाउन के यह दिन जिंदगीभर याद रहेंगे।              
रिश्तेदारी में बिताना पड़ा डेढ़ महीना
बानमोर निवासी लाल सिंह गौर ने बताया कि वह मु बई के कल्याण में रहने वाले अपने रिश्तेदार के यहां क ाम से गए थे। लेकिन अचानक लॉकडाउन शुरु हो गया। लॉकडाउन के कारण मुझे 45 दिन अपने रिश्तेदार के यहां मजबूरीवश काटने पड़े।                    
 सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पहुंचाया बसों तक
श्रमिक स्पेशल ट्रेन से ग्वालियर पहुंचे इन श्रमिकों को प्लेटफार्म नंबर एक पर बनाए गए गोलों पर खड़ा किया गया था। एक-एक कर प्लेटफार्म नंबर एक के वीआईपी व जनरल गेट के काउंटरों पर तैनात डॉक्टरों की टीम ने थर्मल स्क्रीनिंग करने के बाद इन मजदूरों को उनके संबंधित कस्बों में जाने के लिए सर्कु लेटिंग एरिया में खड़ी बसों में सवार किया गया।