क्रोध की अग्नि में हमारे खून के रिश्ते जलकर भस्म हो जाते हैं-मुनिश्री

Apr 29 2020

ग्वालियर। क्रोध आत्मा के लिए बुखार के समान है। जिस प्रकार बुखार होने पर शरीर टूट जाता है या कमजोर हो जाता है, उसी प्रकार क्रोध करने से आत्मा कमजोर हो जाती है। अग्नि में जो भी चीज डाली जाती है, जल जाती है। इसी प्रकार क्रोध की अग्नि में हमारे खून के रिश्ते जलकर भस्म हो जाते हैं। यह विचार राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने बुधवार को तानसेन नगर स्थित न्यू कॉलोनी में धर्मचर्चा में व्यक्त किये। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज भी मोजूद थे।
मुनिश्री ने कहाकि एक घंटा क्रोध 24 घंटे तनाव पैदा रखता है। कोई भी कार्य करने का मन नहीं करता। किसी से प्यार स्नेह करेन का मन नहीं करता और खाने की रुचि भी कम हो जाती है अब आप ही देखो कितना खतरनाक होता है क्रोध। आज घर परिवार इस क्रोध की अग्नि के कारण भस्म होते जा रहे हैं।
मुनिश्री ने कहाकि धर्म बिना सुख नहीं। भौतिकता की चकाचौंध और धर्म में अरूचि से मनुष्य दुखी है। धन कपूर के जैसे नष्ट होने वाला है। लेकिन धर्म आकाश की तरह विशाल, अनन्त है। ज्ञानीजन कहते हैं धर्म दीपक की तरह आत्मा का अंधकार मिटाता है। हम सबके पास यह दीपक, तेल और बाती है लेकिन जरूरत है तो छोटी-सी चिंगारी से प्रकाशमान करने की। मात्र दिखावे से नहीं धर्म का आचरण करने से धार्मिक होता है।
 जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागरजी ने विशेष मंत्रो का उच्चारण कर भगवन शांतिनाथ का अजय जैन व विजय जैन अमन जैन ने अभिषेक ओर शांतिधारा की। दीपो से आरती की गई। हवन कुंड में विश्व मे कोरोना वायरस से बचाने के लिए मंत्रो का उच्चारण कर आहुतिया दी।