दूसरा व्यक्ति पीडि़त और हमारे अंदर करुणा नहीं तो धर्म व्यर्थ -मुनिश्री
Apr 28 2020
ग्वालियर। हमें जीवन में परिवर्तन लाना है तो धर्म का सहारा लेना पड़ेगा। यदि श्रद्धा जाग गई होती तो हमारे जीवन में परिवर्तन हो जाता। समर्पण भी होना जरूरी है जिस व्यक्ति के अंदर धर्म होगा तो नैतिकता भी होगी। यह विचार मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने मंगलवार को तानसेन नगर स्थित न्यू कलोनी में धर्मचर्चा में व्यक्त किए। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज भी मोजूद थे।
मुनिश्री ने अनेक उदाहरण देकर धर्म की परिभाषा बताई। हम आदमी कैसे बनेंगे जब तक हमारे जीवन में धर्म नहीं आएगा। दूसरा व्यक्ति पीडि़त है और आपके अंदर यदि करुणा नहीं है तो आपका सब व्यर्थ है। कल्याण तभी होगा जब सभी जीवों के प्रति करुणा के भाव रहे। अपनों के प्रति करुणा के भाव नहीं रहते हैं आज।
मुनिश्री ने कहा सबसे बड़ी क्रूरता हमारे जीवन में यह आ रही है कि हम शून्य होते जा रहे हैं। हम स्वयं जिए और दूसरों को भी जीने दें। यदि बच्चों को हिंसा के कार्य सिखाएंगे तो बच्चे इन कार्यों में आगे रहेंगे। अपने जीवन को अच्छा बनाएं।
मुनिश्री ने कहाकि सामायिक करना सकारात्मक बदलाव नहीं है वह बाहरी परिवर्तन है, लेकिन अंतर में समता भाव आएगा तभी आंतरिक परिवर्तन आएगा यह जरूरी है। इसके साथ बाहरी परिवर्तन सोने पर सुहागा के समान दूसरों को आकर्षित करने वाला होता है। संसार को दुखों का हार बताते हुए उन्होंने कहा कि पूर्णत: व्यक्ति सुख से रह सके यह संभव नहीं है। वह चाहे अमीर हो या गरीब।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज कोरोना वायरस को हराने के लिए प्रतिदिन मंत्रो का उच्चारण कर भगवन शांतिनाथ का अजय जैन व विजय जैन ने भक्तिपूर्वक अभिषेक ओर भगवान के मष्तक पर शांतिधारा की। अभिषेक के उपरांत आरती की गई।
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









