राहत मिलते ही जेएएच पहुंचे मरीज

Apr 25 2020

 
ग्वालियर। केन्द्र सरकार द्वारा दी गई फ ौरी राहत की खबर पाते ही सुबह से ही जेएएच सहित मुरार व सिविल अस्पताल में साधारण बीमारियों से पीडि़त सैकड़ों मरीज इलाज के लिए ओपीडी में जा पहुंचे। मरीजों की एकाएक बढ़ी भीड़ से कोल्ड ओपीडी में इलाज दे रहे डॉक्टरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इलाज नहीं मिलने पर मरीज व परिजनों ने हंगामा शुरु कर दिया। हंगामे को देख जेएएच पहुंचे मरीजों को कैज्यूलिटी व ट्रॉमा सेंटर में ड्यूटी दे रहे डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज किया।
केन्द्र सरकार द्वारा जारी की गई नई गाइड लाइन में लॉकडाउन झेल रहे शहरवािसयों को कु छ राहत दी है। केन्द्र द्वारा दी गई रियायत की खबर कानों में पड़ते ही शनिवार सुबह आठ बजे से ही जेएएच स्थित ओपीडी में मामूली रोग से पीडि़त सैकड़ों मरीजों की लाइन ओपीडी में डॉक्टरों के चेंबरों के बाहर लगना शुरु हो गई थी। मरीजों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि मामूली रोग से पीडि़त मरीज इलाज के लिए मुरार जिला व हजीरा स्थित सिविल अस्पताल जाएं। यह बात सुनकर मरीज व परिजन भड़क गए।
मरीजों को हंगामा देख अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में इलाज के लिए पहुंचे सैकड़ों मरीजों को इलाज के लिए कैज्यूलिटी व ट्रॉमा सेंटर रैफर करने के बाद ही कोल्ड आपीडी में मरीजों की भीड़ कम हो सकी। 
जेएएच है कोविड-19 अस्पताल 
जीआरएमसी के अधीन आने वाले जेएएच अस्पताल को प्रदेश सरकार ने कोविड-19 अस्पताल बनाया है। ऐसे में जेएएच क ी ओपीडी में कोरोना संक्रमण के लक्षण दि ाने वाले मरीजों के लिए ही चौबीस घंटे कोल्ड ओपीडी संचालित हो रही है। वहीं अस्पताल अधीक्षक डॉ.अशोक मिश्रा ने शहर वासियों से कहा है कि साधारण बीमारी के मरीज इलाज के लिए ओपीडी नहीं पहुंचे। साधारण रोग से पीडि़त मरीज जिला अस्पताल में इलाज कराने जाएं। जेएएच की ओपीडी में चौबीस घंटे कोल्ड ओपीडी के साथ ही कैज्युलिटी सहित ट्रॉमा सेंटर में गंभीर मरीजों के लिए इलाज उपलब्ध है।           
सिविल अस्पताल में भी पहुंचे सैकड़ों मरीज
लॉक डाउन में दी गई फोरी राहत के बाद शनिवार को मुरार व सिविल अस्पताल हजीरा में भी सैकड़ों मरीज इलाज की आस लेकर सुबह नौ बजे से पहले ही पहुंच गए थे। इन दोनों सरकारी अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टरों ने बताया कि केवल इलाज के लिए चार से पांच सौ के बीच मरीज पहुंचते थे। लेकिन शनिवार को इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की सं या दो गुना बढ़ गई है। इन सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढऩे का कारण शहर में संचालित होने वाली सभी शासकीय डिस्पेंसरियों के साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का बंद होना माना जा रहा है।