धन का लोभ त्यागें और धर्म की राह पर चलिए : मुनिश्री

Apr 21 2020

ग्वालियर। मनुष्य को दो चीजों से हमेशा दूर रहना चाहिए एक तो क्रोध व दूसरा अहंकार। यह दोनों चीजें मनुष्य के जीवन को नर्क बना देती हैं। जिस मनुष्य के पास धन नहीं होता उसे नींद से उठाने की जरूरत पड़ती है लेकिन जिसके पास धन होता है उसे सुलाने के लिए नींद की गोलियां देनी पड़ती है। इस लिए धन का लोभ त्यागें और धर्म की राह पर चलिए। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने मंगलवार को तानसेन नगर स्थित न्यू कालोनी में व्यक्त किए। इस मौके पर मुनिश्री विजयेश सागर महाराज भी मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि हमें गुरु का हाथ नहीं पकडऩा चाहिए बल्कि गुरु को अपना हाथ पकड़ाना चाहिए क्योंकि मुश्किल समय में हम गुरु का हाथ छोड़ सकते हैं लेकिन गुरु हमारा हाथ कभी नहीं छोड़ेगा। मुनिश्री ने कहा कि साधु और गुरू में अंतर होता है। साधु स्वयं के लिए होता है और अपना कल्याण करता है जब कि गुरु शिष्यों के लिए समर्पित होता है और अपने शिष्यों का कल्याण करता है। 
मुनिश्री ने कहा कि संसार में मनुष्य को अपने बचे हुए धन में से धर्म के लिए दान दिया जाना भीक्षा के समान माना जाता है। दान अपने जीवन के खर्चों में से निकालकर दिया जाना ही परोपकारी दान होता है। मनुष्य को यह नहीं सोचना चाहिए कि मेरे पास समय होगा तो ही मैं धर्म कर पाऊंगा। अपितू धर्म वहीं है जिसमें मनुष्य अपने कार्य को शुरू करने से पूर्व धर्म के लिए मंदिर जाकर भगवान की आराधना करे और उसके बाद अपने सांसारिक कार्यों को समय दे वहीं सच्चा धर्मी होता है।
 जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागरजी ने विशेष मंत्रो का उच्चारण कर भगवन शांतिनाथ का अजय जैन व विजय जैन अमन जैन ने अभिषेक ओर शांतिधारा की। दीपो से आरती की गई। हवन कुंड में विश्व मे कोरोना वायरस से बचाने के लिए मंत्रो का उच्चारण कर आहुतिया दी।