संसारी प्राणी तन से ज्यादा मन से दुखी है-मुनिश्री

Apr 19 2020

ग्वालियर। आज का मनुष्य तन से ज्यादा मन से दुखी है। जो कहता है कि है प्रभु आप के ही आशीर्वाद का प्रसाद है कि मेरा पांच खंड का मकान है। अच्छा परिवार है। किंतु एक ही आकुलता है कि पड़ोसी का दस खंड का भवन क्यों है। जो मेरे मन में खटकता है। यह विचार राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने रविवार को तानसेन नगर स्थित न्यू कालोनी में धर्मचर्चा में व्यक्त किये।
मुनिश्री ने कहा कि आज का मनुष्य सामने वाले का भला नहीं चाहता। जिसके कारण वह मन से दुखी रहता है। मनुष्य मोह, राग, द्वेष से दुखी है। अपनी दुकान के आगे दूसरे की दुकान खुलने पर दुखी हो जाता है। मुनिश्री ने कहा कि क्षत्रिय वही कहलाता है जो पाप से बचे और दूसरों को बचाए तथा असहायक जीवों की रक्षा करें। सब कुछ होते हुए भी संसारी प्राणी बहाना करता है कि मेरे पास ऐसा होता। तो मैं ऐसा करता। आम आदमियों को समझना आज मुश्किल हो गया है।
मुनिश्री ने कहा कि जीवन मिट्टी की तरह है, उससे मंगल-कलश भी बनाया जा सकता है तो शराब का कुल्हड़ भी। जीवन अनाढ़ पत्थर की तरह है उससे भगवान भी बनाये जा सकते हैं तो उससे सिलौटी भी बनाई जा सकती है। हम अपने उज्ज्वल आचरण के बल पर उसमें एक सुंदर चित्र को अभिव्यक्त कर सकते हैं तो अपने स्याह आचरण से उसे कलंकित भी कर सकते हैं
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि प्रतिदिन मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने कोरोना वायरस को लेकर मंत्रो से भगवान शांतिनाथ का अभिषेक एवं शन्तिधार अजय जैन विजय जैन ने की। भगवान की पूजन अष्टद्रव की गई। दीपो से भगवन की आरती उतारी।