अपने कल्याण का काम स्वयं करना पड़ता है-मुनिश्री

Apr 17 2020

ग्वालियर। अपने कल्याण की कामना करने वाले लोगों को तो अपने कल्याण का काम स्वयं ही करना पड़ेगा। जिस प्रकार बीमार होने पर ठीक होने के लिए दवाई तो स्वयं ही लेनी पड़ती है। संसार का काम तो कोई और भी कर लेगा, वह तो ऐसे ही चलता रहता है। यह विचार मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने शुक्रवार को तानसेन नगर स्थित न्यू कालोनी में धर्मचर्चा में कही। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज भी मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि परमात्मा हमारे घट में ही मौजूद हैं, वे हमसे दूर नही हैं। यदि वे हमें नहीं मिलते तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे हमसे दूर हैं, बल्कि हममें उनको पाने की लगन की कमी है। निरंतर बदलते संसार पर विश्वास करना ही भगवत्प्राप्ति में मु य बाधा है।
मुनिश्री ने कहाकि मां-बाप की सेवा करना धर्म है। वह तो चाहे कैसे भी हिसाब हो, पर यह सेवा करना हमारा धर्म है और जितना हमारे धर्म का पालन करेंगे, उतना सुख हमें उत्पन होगा। बुजुर्गों की सेवा तो होती है, साथ-साथ सुख भी उत्पन्न होता है। मां-बाप को सुख दें, तो हमें सुख उत्पन्न होता है। मां-बाप को सुखी करें, वे लोग सदैव, कभी भी दुखी होते ही नहीं है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने मंत्रो से भगवान शांतिनाथ का अभिषेक एवं शन्तिधार अजय जैन विजय जैन ने की। भगवान की मुनिश्री ने पूजन अष्टद्रव से करवाई। दीपो से आरती उतारी।