भक्तों की भगवान से दूरी, पुजारी परेशान

Apr 17 2020

ग्वालियर। लॉकडाउन के चलते भक्तों की भगवान से दूरी क्या बढ़ी, आफत पुजारियों पर आ गई। लॉकडाउन के चलते सभी मंदिरों पर ताले लटके हुए हैं। ना तो भक्तों की गूंज मंदिरों पर सुनाई पड़ रही है ना ही घंटों की आवाज। गिने-चुने भक्त ही मंदिर पहुंच रहे हैं और वे भी दूर से अपने आराध्यदेव के हाथ जोड़कर चले जा रहे हैं। मंदिर खुलते भी हैं तो काफी कम समय के लिए। सुबह शाम सिर्फ पूजा आरती के लिए और इस दौरान भी सिर्फ मंदिर के पुजारी को ही मंदिर में जाने की इजाजत है। मंदिर के पुजारी पूरे विधि विधान से पूजा में जुटे हैं पर मन ही मन उनको भी चिंता सताने लगी है कि, हे प्रभु यह दौर कब तक चलेगा क्योंकि अब तो उनकी जेब में भी कोई चार पैसे डालने वाला नहीं है।  
ग्वालियर में राम मंदिर, अचलेश्वर महादेव, कोटेश्वर महादेव, साईं बाबा का मंदिर, मंशापूर्ण हनुमान, खेड़ापति हनुमान, शिंदे की छावनी का गणपति मंदिर, मुरार स्थित सूर्य मंदिर, छत्री स्थित नागदेवता मंदिर और रोकडिय़ा सरकार का मंदिर आस्था के उन प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं जहां अल सुबह से घंटियां बजनी शुरु होती थीं तो आधी रात के बाद तक भक्तों की आवाजाही लगी रहती थी। पट बंद होने के बाद भी यहां भक्तों का पहुंचना जारी रहता था और इन भक्तों की जेब से सभी के लिए कुछ ना कुछ निकलता रहता था। कुछ निराश्रितों की सेवा के लिए आते थे तो कुछ सिर्फ पुजारियों के सेवा भाव से खुश होकर अपनी जेब में हाथ डालकर श्रद्धा भेंटकर चले जाते थे।                  
मंदिर के आसपास पूजा का सामान बेचने वाले भी परेशान
ऐसा नहीं है कि मंदिर से भक्तों की दूरी बढऩे से सिर्फ पुजारी ही परेशान है। एक हजार के आसपास ऐसे भी परिवार हैं जिनकी रोजी-रोटी मंदिर के आसपास बैठ कर काम धंधा करने से ही चलती थी। यह लोग फूल बेचते थे। मालाएं बेचते थे। नारियल-अगरबत्ती-प्रसाद-घी के दीए-चना बेचकर चार पैसे कमाते थे और अपना घर चलाते थे। अब यह सभी अपने-अपने घरों पर बैठे हैं। लॉकडाउन के बाद भी गिर्राज जी मंदिर के पास थोड़े से फूल लेकर बैठे रामअवतार ने कहा, रोज यहां फूल लेकर आता हूं। लोग आते हैं और घर में पूजा पाठ के लिए फूल खरीद ले जाते हैं। जो बिक जाते हैं वे बेच देता हूं बाकी खुद ही अपने हाथों से प्रभु को यह सोचकर समर्पित करके घर चला जाता हूं कि यदि प्रभु की यही इच्छा है तो यह ही सही, लेकिन ऐसा हमेशा तो रहेगा नहीं।
अब सब ठप
लेकिन अब हालात बदले हुए हैं। पुजारियों को दक्षिणा हाथ में लिए तीन सप्ताह बीत चले। अचलेश्वर महादेव के एक पुजारी ने कहा, अन्य दिनों में भक्त नई-नई गाडिय़ां खरीद कर लाते थे और उनसे पूजा करवाते थे। वे गाड़ी खरीदने की खुशी में दक्षिणा भी भरपूर देते थे पर गाडिय़ां ही नहीं बिक रहीं है तो यह दक्षिणा भी ठप है। इसके अलावा मंदिर में दिन भर अनुष्ठान- पूजा-पाठ करवाने वाले भी पहुंचते रहते थे। यह भी अच्छी दक्षिणा देते थे, इससे मंदिर से जुड़े सभी पुजारियों को घर चलाने के लिए राहत मिल जाती थी पर अब यह राहत भी बिलकुल थम गई है।