आज का मानव अगर वर्तमान में रहना सीख जाए तो सुखी हो सकता है-मुनिश्री

Apr 14 2020

ग्वालियर। आज का मानव अगर वर्तमान में रहना सीख जाए तो सुखी हो सकता है। वर्तमान में जीकर ही भविष्य को संवारा जा सकता है, और दूसरा कोई रास्ता नहीं है। परंतु आज इंसान वर्तमान में न जीकर भविष्य की योजना बनाने में उलझा रहता है जिससे उसे दुख भोगना पड़ता है। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने मंगलवार को तानसेन नगर स्थित न्यू कालोनी में धर्मचर्चा में कही! मुनिश्री विजयेश सागर महाराज भी मौजूद थे।
 मुनिश्री ने कहा कि आज हमारे पास संपदा तो है पर शांति नहीं है। इसका कारण है हम वर्तमान में न जीकर या तो भूत में उलझे हैं या भविष्य में। और इस कारण हमें जो प्राप्त होता है उसमें हम संतुष्ट न रहकर और अधिक पाने की चाहत में न जाने कितने प्रपंच करते रहते हैं। यही कारण है कि हम संतुष्ट नहीं रह पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में प्रत्येक प्राणी को जीने का अधिकार है। ऐसे में हमें याल रखना चाहिए कि हमारे कारण किसी भी प्राणी को कोई कष्ट न पहुंचे।
मुनिश्री कहा कि आज के इंसान को संतोष नहीं है, वह कितनी भी दौलत कमाले परंतु और ज्यादा कमाने की चाहत उसे सुख से नहीं रहने देती। दौलत कमाने की चाह में इंसान भूल जाता है कि अंत समय में किया गया पुण्य ही साथ जाएगा। इसलिए दौलत के साथ कुछ पुण्य भी कमाओ जिससे आने वाले भव सुधर सकें। 
  जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज कोरोना वायरस को हराने के लिए प्रतिदिन मंत्रो का उच्चारण कर भगवन शांतिनाथ का अजय जैन व विजय जैन अमन जैन एवं बच्चों  ने भक्तिपूर्वक अभिषेक ओर शांतिधारा की! अभिषेक के उपरांत आरती की गई।