क्रोध व बैर के शमन के लिए भगवान महावीर ने उपवास और क्षमा शब्द दिया है-मुनिश्री

Apr 04 2020

ग्वालियर। उत्तेजक तत्व है। जो मनुष्य को उग्र बनाता है और बैर की नींव डालता है। क्रोध क्षणिक आता है और चला जाता है। किन्तु अपना प्रभाव और भयानक तत्व छोड़ जाता है। जो अनेक जन्मों तक आत्मा पर छाया रहता है। दुश्मनी का पाप जन्मों-जन्मों तक साथ रहता है। क्रोध व बैर के शमन के लिए भगवान महावीर ने उपवास और क्षमा शब्द दिया है। क्रोध के उफान को निरस्त करना उपशम है। क्रोध मानव का मूल स्वभाव नहीं है। मनुष्य मूल प्रकृति शांत भाव से रहने की है। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने शनिवार को तानसेन नगर स्थित न्यू कालोनी में धर्मचर्चा में कही। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन  आदर्श कलम ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने मंत्रो से भगवान शांतिनाथ का अभिषेक एवं शन्तिधार अजय जैन विजय जैन ने की। भगवान की पूजन अष्टद्रव से कर आरती उतारी।