डाक्टर मरीजों का जान हथेली पर रख कर रहे इलाज

Apr 03 2020

ग्वालियर। कोरोना वायरस से पीडि़त पॉजीटिव मरीज का इलाज डॉक्टर ही नहीं बल्कि पैरामेडिकल स्टाफ जान हथेली पर रख कर रहे हैं। मरीज का इलाज करने के दौरान पैरामेडिकल स्टाफ में भी संक्रमण फैलने का डर हमेशा ही बना रहता है। हालांकि इंफेक्शन से बचाव के लिए इलाज करने वाले इस पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इग्यूपमेंट) किट पहनकर मरीज का इलाज करना पड़ता है।
देश में तेजी से पैर पसार रहे कोरोना वायरस के डंक ने अंचल को भी अपनी चपेट में ले रखा है। ग्वालियर में अब तक दो कोरोना पॉजीटिव मरीजों को जेएएच में बनाए गए विशेष आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रखकर किया जा रहा है। कोरोना वायरस का डंक इतना घातक है कि इसका इलाज करने वाले डॉक्टर ाी जरा सी भी लापरवाही बरतने के कारण इस संक्रमण का शिकार बन रहे हंै। संदिग्ध मरीजों के लिए क्वारेंटाइन वार्ड वहीं ऐसे लोग जो कोरोना संक्रमित मरीज के संपर्क में आते हंै ऐसे संदिग्ध को जेएएच के साथ ही मुरार जिला अस्पताल में स्थित क्वारेंटाइन वार्ड में चौदह दिनों के लिए भर्ती कर इलाज किया जाता है। क्वारेंटाइन वार्ड में भर्ती होने के दौरान मरीज के साथ एक ही अटेण्डर को 24 घंटे साथ रहने की अनुमति डॉक्टरों द्वारा दी जाती है। मरीज का क्वारेंटाइन पीरियड पूरा होने के बाद उसे पुन: होम क्वारेंटाइन में भेज दिया जाता है।                 
इलाज करने वाले पैनल में 3 लोग
कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज करने के लिए बनाए गए पैनल में तीन सदस्य होते हंै। इस पैनल में एक डॉक्टर, एक नर्स व एक वार्ड बॉय शामिल रहता है। इलाज देने वाले तीनों सदस्यों को विशेष किट पहनकर इलाज करना पड़ता है। इस आइसोलेशन वार्ड में सिर्फ मरीज के साथ पैरामेडिकल स्टाफ ही मौजूद रहता है वहीं पीडि़त मरीज के अटैण्डर की आइसोलेशन वार्ड में एंट्री प्रतिबंधित रहती है।
इलाज में एंटी वायरल ड्रग्स
कोरोना पीडि़त मरीज को इलाज के दौरान खाने में फु ल डाइट जो उसकी पसंद का होता है दिया जाता है। वहीं इलाज में उसे एंटी वायरल जिसमें रोटोमाबिल व पैनोवेरा के साथ ही हेसीथ्रोमाइसिन व एसक्यूसीएस ड्रग्स का डोज इलाज के दौरान मरीज को लगातार दिया जाता है। पॉजीटिव जांच के 3 दिन बाद दूसरी जांच पॉजीटिव जांच के बाद मरीज को लगातार आइसोलेशन वार्ड में एंटी वायरल डोज देकर उसकी इ यूनिटी बढ़ाई जाती है। पॉजीटिव जांच रिपोर्ट के तीन दिन बाद एक और सेंपल जांच के लिए भेजा जाता है। दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आने पर पुन: तीन बाद अंतिम जांच की जाती है। ये रिपोर्ट भी निगेटिव आती है तो मरीज को डिस्चार्ज कर होम क्वारेंटाइन में भेज दिया जाता है।