समाजसेवी संस्थाएं पहुंचा रही हैं बीस हजार लोगों को भोजन के पैकेट

Apr 01 2020

ग्वालियर। इसे ग्वालियर वालों का जज्बा ही कहेंगे कि लॉकडाउन लागू होने के बाद ग्वालियर में किसी ऐसे परिवार के भूखे सोने की नौबत आई हो जिसका काम-धंधा लॉकडाउन के चलते ठप है। ग्वालियर की तमाम समाजसेवी संस्थाएं इस महायज्ञ में आहूति डालने के लिए कमर कसकर जुट गईं हैं और इन संस्थाओं से जुड़े लोगों को बस एक ही धुन सवार है कि ग्वालियर में रहने वाले गरीब परिवार हों या फिर ग्वालियर से पैदल-पैदल अपने घर को जा रहे लोग, कोई भी भूखा ना रहे। ग्वालियर शहरी सीमा की तमाम गरीब बस्तियों में तो यह संस्थाएं दस्तक दे ही रही हैं साथ ही ग्वालियर से निकलने वाले नेशनल हाईवे पर भी वे किसी को भूखे पेट सफर नहीं करने दे रहे हैं। कुल मिलाकर हालात यह हैं कि ग्वालियर में रोजाना करीब बीस हजार लोगों को भोजन के पैकेट यह संस्थाएं पहुंचा रही हैं। इतना ही नहीं, यह लोग उन पुलिस वालों की भी सुध ले रहे हैं जो सुबह आठ बजे से कमर कसकर सड़क पर आ खड़े होते हैं।
जीवाजी क्लब का भरा है भंडार
इस काम में जुटे जीवाजी क्लब से सचिव तरुण गोयल कहते हैं कि क्लब में रोजाना 1600 पैकेट बन रहे हैं और वितरित हो रहे हैं।इसके लिए फंडिंग पर वे कहते हैं,इसके लिए मैं क्लब के सदस्यों का दिल से आभारी हूं कि उन्होंने हाथ खोल रखा है। तीन दिन में लगभग दस लाख की फंडिंग हो चुकी है। नकद भी सदस्य दे रहे हैं और आटा-चावल-तेल भी खूब आ रहा है। सचिव गोयल कहते हैं कि क्लब का भंडार भरा है और क्लब की टीम भी साथ काम कर रही है। जो इस काम में सुबह से जुट जाते हैं। क्लब का स्टॉफ भी इसमें बढ़कर- चढ़कर हिस्सा ले रहा है। वितरण की व्यवस्था दीपक गोयल, महेंद्र साहू, नरेश जैन, हर्ष सेठ, मोहन गर्ग, सुशील कटारे, निर्मल खत्री, अनिल सांखला, राकेश अग्रवाल आदि संभाले हुए हैं।
शहर भर में अचलेश्वर महादेव ट्रस्ट, गुरुद्वारा समित, अग्रवाल युवक-युवती परिचय स मेलन, जैन समाज जैसी संस्थाएं तो भोजन का वितरण कर ही रही हैं पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल अपने घर पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लंगर चला रहे हैं तो विधायक प्रवीण पाठक भी भोजन वितरण में जुटे हैं।
तड़के से ही तैयारियां शुरू
भोजन वितरण से जुटी संस्थाओं को मालूम है कि भोजन किस समय पहुंचना जरूरी है और इस उधेड़बुन में इस काम से जुड़े लोग तड़के ही जुट जाते हैं। कई सैकड़ा हाथ जुट जाते हैं आटा गूंथने और सब्जी काटने में। इसके बाद सब्जी बनाने-पुड़ी तलने- पुलाव पकाने का काम शुरु होता है जो सुबह आठ बजे तक अपने मुकाम पर पहुंच जाता है। फिर दूसरी टीम खाना पैक करने में जुट जाती है और इसके बाद वितरण का काम शुरु हो जाता है। जो बस्तियां चिन्हित हैं वहां तो भोजन पहुंच ही रहा है, नई बस्तियों की खोज में इन संस्थाओं के सदस्य करते रहते हैं।