भोज के लिए ना कन्याएं मिल रहीं ना लांगुर

Apr 01 2020

ग्वालियर। नवरात्रे समापन की ओर है। आज अष्टमी है और आज नवमी है पर नवरात्रे पर भी कोरोना का असर खूब देखने को मिल रहा है। नवरात्रे पर कन्या भोज करवाने वालों को ना तो कन्याएं भोज के लिए मिल रही हैं ना ही कन्याओं के साथ आने वाले लांगुर (छोटे-छोटे बालक) मिल पा रहे हैं।
कन्या भोज करवाने वाले जहां भी न्योता भेज रहे हैं, वहां से टका सा जवाब मिल रहा है कि कोरोना का डर है। इसलिए हम कन्याओं को नहीं भेज सकते। ऐसे में लोगों ने रास्ता यह निकाला है कि वे भोज का खाना बना तो रहे हैं पर खुद ही उन लोगों को बांटने के लिए निकल रहे हैं जिनके घरों में लॉकडाउन के चलते चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं।
शारदेय नवरात्रे पर जहां जगह-जगह भंडारे होते हैं वहीं चैत्र के नवरात्रे पर घर-घर कन्या भोज करवाया जाता है। ऐसा आकलन है कि यह भोज शहर के हर दूसरे घर में होता है। जिन घरों में लोग नवरात्रे का व्रत रखते हैं वे कन्या भोज धूम-धाम के साथ कराते हैं। कन्याओं को भी बुलाते हैं और उनके साथ लांगुरों को भी न्योता दिया जाता है और जिन घरों में लोग सिर्फ पहले और आखिरी दिन व्रत रखते हैं वे भी कन्याओं को अपने घरों पर भोज के लिए बुलाते हैं। यह क्रम सप्तमी से शुरु होकर रामनवमी तक चलता है।
यह दर्द किसी एक घर का नहीं है बल्कि कन्या भोज की चाहत रखने वाले हर घर का यही दर्द है। कालोनियों- मौहल्लों में सन्नाटा खिंचा हुआ है इसलिए लोग ना तो खुद ही घर से बाहर निकल रहे हैं ना ही अपनी छोटी-छोटी बेटियों को कन्या भोज में जाने दे रहे हैं। राकेश शर्मा कहते हैं कि कई लोगों ने हमारी बेटियों को बुलाया पर हमने उन्हें नहीं भेजा क्योंकि कोरोना का डर हमें भी सता रहा है और हमारी बेटियां भी टीवी के न्यूज चैनल पर कोरोना के बारे में सुन-सुनकर दहशत में हैं और वे खुद भी घर बाहर निकलने से डर रही हैं।
चैत्र की हर नवरात्रे पर कन्याओं को भोज करवाने वाली आरती मिश्रा कहती हैं कि कोरोना के डर के मारे जब कोई घर से निकल ही नहीं रहा है तो लोग कन्याओं को भी भोज पर भेजने से डरने लगे हैं, जिस भी घर की घंटी बजा कर कन्या को भोज के लिए आमंत्रित करो, वहां से यही जवाब मिल रहा है कि जब तक लॉकडाउन है हमारे घर से ना तो कोई बाहर जा रहा है ना ही बाहर का कोई व्यक्ति हमारे घर में आ रहा है। इस जवाब के साथ लोग माफी भी मांग रहे हैं। यही कारण है कि यह समझाने के बाद भी कि हम कन्याओं को घर में दूर-दूर बैठाएंगे, लोग कन्याओं को भोज पर भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। आरती मिश्रा कहती हैं कि आज अष्ठमी को हमने व्रत खोलने से पहले कन्या भोज का भोजन उन लोगों में वितरित करवा दिया जिनके पास अभी कमाने-खाने का कोई जरिया नहीं है।