ज्ञान पाना है तो लगानी होगी खुद के भीतर डुबकी: मुनिश्री

Mar 30 2020

ग्वालियर। व्यक्ति खुद के भीतर छिपे ज्ञान को पहचान जाए तो फिर उसे किसी भी सांसारिक वस्तु की जरूरत नहीं रह जाती। लेकिन अगर ज्ञान पाना है तो मनुष्ट को खुद के भीतर डुबकी लगानी होगी। यह बात  मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज की साधना अनुष्ठान में  सोमवार को तानसेन नगर स्थित न्यू कालोनी में व्यक्त किए! मुनिश्री विजयेश सागर महाराज मौजूद थे!
मुनिश्री ने कहा कि परिचय से दूर हो जाओ, अगर परिचय करना ही है तो स्वपरिचय करो। खुद को जानो और स्वयं के मूल्यों को पहचानो। क्योंकि स्वपरिचय ही व्यक्ति को मुक्ति मार्ग की ओर ले जाता है। उन्होंने कहाकि मनुष्य के सभी दुखों का कारण उसकी आकांक्षये है। मुनिश्री ने कहा कि मोह के पर्दे के कारण धर्म, संस्कृति और सुसंस्कारों का ज्ञान ही व्यक्ति को नहीं हो पाता है। लेकिन संस्कृति संस्कार बदलने से ही बदलती है।
मुनि श्री ने कहाकि - मानव को ज्ञानी व तेजस्वी लोगों की संगति करनी चाहिए। मानव सामाजिक प्राणी है। कहते हैं कि मनुष्य अपनी संगति से पहचाना जाता है। मानव की संगति जैसी होती है वह धीरे-धीरे वैसा ही बन जाता है। अज्ञानी का संग मानव के व्यक्तित्व व चरित्र का पतन करता है। वहीं ज्ञानी का साथ व्यक्ति के व्यक्तित्व का उन्नयन करता है। एक धर्म-ग्रंथ में लिखा है कि मनुर्भव यानी मनुष्य बनें। मनुष्य बनकर यह भी आवश्यक है कि हम स्वयं को उठाएं, गिराएं नहीं। ज्ञानी व सदाचारी का साथ उन्नति में सहायक है। सत्य यानी सत्य, संग का आशय है साथ। सत्संग का अर्थ है-सत्य का साथ। सत्य का साथ हमें सत्पथगामी के साथ रहने से ही मिलेगा।
 जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज की साधन, अखण्ड मौन, उपवास एवं अनुष्ठान चल रही रहे है। इसी दौरान आज मुनिश्री विहर्ष सागरजी ने 108 विशेष मंत्रो का उच्चारण कर भगवन शांतिनाथ का अजय जैन व विजय जैन ने अभिषेक ओर शांतिधारा की। मुनिश्री के पद प्रक्षालन करने का जैन समाज प्रवक्ता सचिन जैन आयुषी जैन को सौभग्य प्राप्त हुआ। हवन कुंड में विश्व मे कोरोना वायरस से बचाने के लिए मंत्रो का उच्चारण कर आहुतिया दी। मुनिश्री का 48 घंटे बाद उपवास खोलकर आहारचर्या की।