चैत्र नवरात्रि शुरू, सादगी से हो रही शक्ति की उपासना
Mar 25 2020
ग्वालियर। कोरोना के कारण शहर की उत्सवी परंपरा को भी ग्रहण सा लग गया है। जो त्योहार सब मिल-जुलकर मनाते हैं, वह बुधवार को जगत जननी मां दुर्गा की पूजा अर्चना मंदिरों में जाने के बजाए सादगी से घर में कर रहे हैं। बुधवार को शक्ति की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो गए, इसके साथ ही आज हिंदू नववर्ष का आगाज भी हो गया। गुड़ी पड़वा का पर्व सादगी से महाराष्ट्रीयन समाज मना रहा है तो झूलेलाल मंदिरों में भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव चेटीचंद महोत्सव भी मनाया गया। चैत्र नवरात्रि पर सिंहवाहिनी की भक्ति में कोई कमी नहीं रहेगी, लेकिन देवी मंदिरों में भीड़ नहीं होगी।
हिंदू नववर्ष पर घरों में गुड़ी सजी, श्रीखंड भी बना, लेकिन उसका स्वाद परिचितों, रिश्तेदारों के साथ साझा नहीं हो पाया। हिंदू नववर्ष, प्रमादी नामक शुभ विक्रम संवत 2077 और वासंतिक (चैत्र) नवरात्रि पर्व की शुरुआत बुधवार से हो गई। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर्व की समस्त तिथियों के उद्यातकालीन और संपूर्ण दिवस पर्यंत होने से चैत्र नवरात्रि पूर्ण दिवस है अर्थात पूरे नौ दिन की है। इस वर्ष नवरात्रि पर्व में सभी तिथि संपूर्ण दिवस में होने से महाष्टमी का पूजन 1 अप्रैल बुधवार और महानवमी का पूजन 2 अप्रैल गुरुवार को होगा।
बुधवार को मां जगद बा नाव पर सवार होकर आईं। नवरात्रि को शुभता और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जा रहा है कि नौ दिनों तक विधि विधान से पूजा अर्चना करने पर माता रानी कोरोना के कहर से पार लगाएंगी। बुधवार सुबह 11.36 पर शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ महामाई की पूजा अर्चना घरों में शुरू हो गई और कई देवी मंदिरों में पुजारियों ने माता की आरती कर भक्तों के लिए पट बंद कर दिए।
झूलेलाल महोत्सव के दौरान शोभायात्रा निकाली जाती है और प्रसादी का वितरण किया जाता है लेकिन क र्यू के चलते बुधवार को सुबह भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव शांतिपूर्ण तरीके से मनाया गया और पूजा कर मंदिरों के पट बंद का दिए गए।
9 रूपों में होगा पूजन
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा अर्चना भले ही मंदिरों में नहीं हो रही हो लेकिन घरों में शक्ति की उपासना की पूजा अर्चना करते हुए कई लोगों ने व्रत रखा है और अखंड ज्योत प्रज्वलित किया है। 9 दिन तक 9 रूपों में सिंहवाहिनी की पूजा अर्चना और उपासना की जाएगी। मान्यता है कि 9 रूपों में पूजा अर्चना 9 दिन तक करने से सभी इ'छाएं पूरी होती हैं।
नवरात्रि के दौरान शहर में प्रसिद्ध देवी मंदिरों में हजारों भक्तों की भीड़ लगी रहती है और महामाई की पूजा अर्चना कर मनोकामनाएं मांगते हैं, लेकिन इस नवरात्रि पर कोरोना वायरस का साया होने से शहर में क र्यू लगा दिया गया है जिसके चलते मंदिरों में सन्नाटा पसरा हुआ है और पट बंद हैं। सातऊं स्थित शीतला माता मंदिर पर विशाल मेला भरता है, लेकिन इस मंदिर पर ताले लटके हैं इसी तरह शहर के वैष्णो देवी, मंशा देवी, करौली माता, नहर वाली माता, मांढरे वाली माता, भेलसे वाली माता, पहाड़ों वाली माता पर सन्नाटा पसरा है।
पर्व को लेकर एक दिन पहले ही तैयारी कर ली गई जिससे परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। मंदिरों में नवदुर्गा महोत्सव के लिए रंगाई-पुताई पूरी हो चुकी थी और भक्तों के लिए मंदिर सजकर तैयार हो गए थे, लेकिन शहर में क र्यू लगने के बाद भक्तों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। मंदिरों में अनुष्ठान विधि-विधान, नियमानुसार पुजारी कर रहे हैं, जो लोग घरों में पूजा अर्चना करते हुए व्रत रखे हैं उन्होंने मंगलवार को ही फलाहारी सामान, फल-फ्रूट ले लिए थे। बुधवार सुबह भी गली-मोहल्लों में फलों के ठेले पर भीड़ देखी गई।
नवसंवत्सर पर सूर्य को दिया अघ्र्य उत्सवी परंपरा को लगा कोरोना का ग्रहण हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2077 प्रमादी की शुरुआत बुधवार 25 मार्च को गुड़ी पड़वा के साथ हो गई। नववर्ष का राजा बुध और मंत्री चंद्र हैं। आज नववर्ष का आगाज सूर्य भगवान को अघ्र्य देकर किया गया और शंख ध्वनि के साथ लोगों ने घरों में एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं। नव संवत्सर पर नगर निगम व संस्कार भारती द्वारा जलविहार में आयोजन किया जाता है, लेकिन शहर में क र्यू के चलते इस आयोजन पर कोरोना का ग्रहण लग गया। संस्कार भारती सहित कई शहरवासियों ने नवसंवत्सर पर अपने घरों की छत पर सूर्य भगवान को अघ्र्य दिया। आज नव संवत्सर पर रेवती नक्षत्र और ब्रह्म योग का मुहूर्त भी बना है।
गुढ़ी पड़वा पर महाराष्ट्रीयन समाज के लोगों ने सामूहिक आयोजन क र्यू के चलते भले ही नहीं किए हों लेकिन घरों के बाहर गुड़ी बांधकर इस उत्सव को मना रहे हैं।
महाराष्ट्रीयन समाज के मोहन अकोल्कर का कहना है कि गुड़ी पड़वा का पर्व सबसे बड़ा पर्व है और इस दिन व्यंजन बनाए जाते हंै और नाते-रिश्तेदार बुलाए जाते हैं, लेकिन क र्यू के चलते इस पर्व को घरों में ही मनाकर गुड़ी की पूजा की गई है। अग्रवाल समाज द्वारा नमकीन व मीठे व्यंजन बनाकर भेजे जाते हैं, लेकिन क र्यू के चलते यह भी नहीं भेजे गए।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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