भारत धर्म और संस्कृति का देश है, इसलिए कोरोना का असर कम है : मुनिश्री
Mar 17 2020
ग्वालियर। भारत धर्म और संस्कृति का देश है। हमें भगवान का आशीर्वाद उनकी करुणा मिली हुई है, इसलिए कोरोना का असर भारत में कम है। जिसने अपने मन को जीत लिया, वह सारे जगत का विजेता है। हम सबसे जीतते हैं, पर मन से हार जाते हैं। जो अपने मन को अपने अंकुश में रखते हैं, वह मन के विजेता कहलाते हैं। जिनके ऊपर मन का असर होता है, वह मन से हारे हुए होते हैं। उक्त उद्गार जैन राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्श सागर महाराज ने मंगलवार को हरिषंकरपुर में जैन मदिर में धर्म शास्त्र चर्चा में व्यक्त किए। मुनिश्री विजयेष सागर महाराज एवं क्षुल्लक विष्वोत्तर महाराज मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि अपने मन पर, अपने विकारों पर नियंत्रण रखो। जिसका मन पर नियंत्रण है वही सच्चे अर्थों में इंसान है। इंसान वह है जिसकी लगाम उसके हाथ में हो और जिसकी लगाम दूसरों के हाथ में है वह इंसान नहीं, पशु समान है। पशुओं की लगाम दूसरों के हाथ में होती है, इंसान की लगाम अपने हाथ में होती है। यदि अपने नियंत्रण में हम खुद हैं तो इंसानियत के उसूल पर खरा उतर रहे हैं। यदि हम अपने में नियंत्रित नहीं हैं, दूसरों से नियंत्रित हो रहे हैं तो हमारे जीवन में पाशविकता का आर्विभाव हो रहा है। यह मौलिक अंतर है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि कोरोना वायरस से जैन साधु साध्वीओ की आहारचार्य में परिवर्तन किया। जिसमें सर्दी जुकाम से पीडि़त व्यक्ति उनके करीब न जाये। साधुओ के पास भीड़ एकत्रित न करे। उनकी आहार चर्या में स्वस्थ व्यक्ति ही जाएं। आहार चर्या की दूर से अनुमोदन करे, और मुॅह पर कपडे बंधे व अपने साफ पानी से हाथ धोकर च मच से आहार दे। साधु को श्रीफल चढ़ाने वाली टेबल कम से कम मीटर दूर रहे। साधु का कमण्डलु वापस करते समय अच्छी तरह पोंछ कर ही वापस करें। जैन साधु समाज की अमूल्य धरोहर है, उनकी रक्षा करना समाज का कर्तव्य है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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