राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्श सागर ससंघ के मंगल प्रवचन हुए

Mar 12 2020

 ग्वालियर। जीवन का ऊंचाईयों पर ले जाना और आत्मकल्याण करना है तो चार बातें जीवन में होना जरूरी है। पहली बात श्रद्धा-जीवन में श्रद्धा के बिना बात नहीं बनती। लेकिन श्रद्धा अंधी नहीं होनी चाहिए, श्रद्धा अटूट होनी चाहिए। दूसरी बात जीवन में संतोष का होना जरूरी है। संतोष का आशय धन, संपदा से नहीं है। चाहे धन, संपदा हो या कोई भी काम मन में संतुष्टि का भाव आना चाहिए। जीवन में जो कुछ मिला, जैसा मिला उसे स्वीकार करो, संतोष का भाव रखो। उक्त उद्गार जैन राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्श सागर महाराज ने गुरूवार को चेतकपुरी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनिश्री विजये सागर महाराज एवं क्षुल्लक विश्वोत्तर महाराज मौजूद थे। 
    मुनिश्री ने बताया ंिक तीसरी बात संयम की है। भावनाओं पर नियंत्रण रखना और प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाना, इससे ही संयम आता है। जिसके जीवन में संयम है वह सुखी है। जिसके जीवन में संयम नहीं है उसका जीवन असंतुलित होगा, असंतुलित जीवन में वह सुखी नहीं रह सकता है। भावों का अतिरिक्त असंयम का परिचय देता है। भावों पर नियंत्रण कर संयमित जीवन जीएं। चौथी बात सोच को सकारात्मक बनाकर चलें। इससे संबंधों में मधुरता आती है, शांति मिलती है। जीवन को ऊंचाईयों तक ले जा सकते हैं। सकारात्मक सोच लेकर चलें, जीवन में सफलता मिलेगी। धर्म को व्यापक रूप में समझें, सिर्फ पूजा, आराधना तक सीमित न रखें। धर्म को व्यवहारिक रूप से आत्मसात करें। जीवन का कल्याण हो जाएगा। मुनिश्री के चरणो में अलग अलग मदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारियो ने श्रीफल चढ़ाकार आर्षिवाद लिया।
  जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्ष कलम ने बताया ंिक आज मुनिश्री विहर्श सागर महाराज एवं मुनिश्री विजयेष सागर महाराज ने सुबह मुनिसुव्रतनाथ जैन मंदिर, शांतिनाथ जैन मदिरं शिदे की छावनी, फालका बाजार जैन मदिर, इंदरगंज जैन मदिर एवं चेतकपुरी जैन मदिंर दर्शन एवं वंदना करने पहुचे। सभी मंदिर समिति कव पदाधिकारियो ने मुनिश्री के पाद प्रक्षालन व आरती उतारकर आशीर्वाद लिया। मुनिश्री ने 15 मार्च को आयोजित होने वाले पंच कल्याणक महोत्सव के लिए संभी मंदिर समितियो को आमंत्रित किया।