जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चले केवट न कराया भगवान को गंगा पार

Mar 09 2020

ग्वालियर। आदर्श रामलीला समिति मैं केवट संवाद  की लीला का मंचन हुआ केवट द्वारा भगवान श्रीराम को गंगा पार कराया सर्वप्रथम भगवान श्री राम लक्ष्मण जानकी अपने गुरु एवं अपने माता पिता की आगे लेकर 1 को निकलते हैं तो दशरथ जी अपने मंत्री सुमंत को यह कह कर भेजते हैं मेरे बच्चे मेरी आज्ञा का पालन करने के लिए जंगल में जा रहे हैं तुम इनको थोड़ा सैर करा कर वापस ले आना तभी आगे  आने पर सभी अयोध्यावासी  राम जी के रथ को रोक लेते हैं और  गाते हुए रोते हैं  कि बन चले राम रघुराई  और संग जानकी माई सेवा में लक्ष्मण भाई यह कहते हुए  वह सभी भगवान के साथ मन जाने को तैयार हो जाते हैं तभी रात होने पर भगवान श्री राम अपनी मोह माया के जाल से अयोध्या वासियों को   घोर निंद्रा में  सुला  कर सोते हुए छोड़कर जंगल में निकल जाते हैं सुबह जब सब अयोध्यावासी  निंद्रा से जागते हैं  तो वह भगवान को ना पाकर  दीवारों में  पेड़ों में  देखते हुए  गाते हैं  की बोलो रे जमीन बोलो आसमान  कौन सी दिशा में गए मेरे भगवान उधर श्री राम गंगा तट पर पहुंचते हैं यहां पर वह सुमंत जी को वापस अयोध्या जाकर पिताजी की सेवा के लिए बोलते हैं और उनके जाने  के बाद मैं केवट के पास आते हैं और केवट को गंगा पार उतारने को बोलते हैं तब केवट उनसे परिचय पूछते हैं जब मैं अपना परिचय राम के रूप में देते हैं तो वह सभी सोच में पड़ जाते हैं और आपस में बातें करते हैं कि यह वही राम है जिनकी पैर की धूल ने  पत्थर की शिला को नारी बना दिया और मैं उड़ गई अगर हमारी नाव  स्त्री  बनकर उड़ गई तो हम अपना व्यापार कैसे करेंगे  काफी देर तक श्री राम और केवट में संवाद के बाद राम जी उन्हें अपनी संशा दूर करने को बोलते हैं  कब केवट उनके चरण धोने की बात कहते हैं और वैसा ही करते हैं और भगवान राम के चरण धोकर जब उन्हें नाव पर   बैठाते हैं अब उन्हें नारायण के दर्शन होते हैं तो गया उनके चरणों से धुले हुए जल   चरणा मत पाकर अपने को धन्य मानते हैं केवट द्वारा  भगवान को गंगा पार  कराते  है तो प्रभु श्री राम उन्हें अपनी अंगूठी देते हैं केवट उसे वापस कर आग्रह करते हैं कि प्रभु आप आए मेरे द्वार मैंने उतारा गंगा पार मैं आऊंगा आपके द्वार आप मुझे करना भव से पार श्रीराम   अपने आशीर्वाद दे आगे बढ़ते हैं उधर अयोध्या में राजा दशरथ श्री राम लक्ष्मण जानकी का इंतजार  करते हुए व्याकुल हो रहे थे तभी उन्हें कुछ वर्ष पूर्व अपने शिकार के दौरान मात-पिता भक्त श्रवण कुमार कि वह दृश्य दिखाई दिए जो अनजाने में उनके द्वारा चलाए गए तीर से मारा गया जो अपने अंधे माता पिता शांतनु और ज्ञान देवी के लिए  जल भरने नदी पर आए थे इसी दौरान लोटे में जल भरते हुए आवाज को दशरथ जी किसी जानवर की आवाज समझ कर तीर चला देते हैं जिसे श्रवण कुमार मारा जाता है दशरथ  जी श्रवण कुमार को देखकर काफी पश्चाताप करते हैं तभी  सरवन कुमार वह पानी को अपने माता-पिता को पिलाने को बोलता है तो जब राजा दशरथ पानी लेकर माता पिता के पास पहुंचते हैं और पूरा किस्सा सुनकर अपने बच्चे को ना पाकर राजा दशरथ को श्राप देते हैं  के जैसे आज हम अपने पुत्र वियोग में दम तोड़ रहे हैं इसी प्रकार तुम भी अपने औलाद के वियोग में दम तोड़ोगे और साथ ही पुणे राम लक्ष्मण जानकी जंगल में घूमते हुए दिखते हैं तभी वहां सुमंत खाली हाथ पहुंचते हैं  जिसे देख कर राजा दशरथ के पूछने पर सुमंत जी बताते हैं कि राम लक्ष्मण जानकी मुझे छोड़कर जंगल पर निकल गए हैं इतना सुनते ही दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं तब तीनों  रानी विलाप करती हैं तो गुरु वशिष्ठ उन्हें शांत कराकर भरत को ननिहाल से बुलवाने को कहते हैं इसी के साथ आज की लीला का मंचन समाप्त होता है और साथ ही प्रभु श्री राम की आरती करियर श्री रघुवर की की जाती है आज के मंचन में सोमनाथ तनेजा धीरज पोपली साहिल शर्मा नरेंद्र सपरा मोहनलालप्रमोद पावा रामनारायण धवन सुरेश नागपाल देवकीनंदन अरोरा ओम प्रकाश मल्होत्रा प्रेम कुमार भरत कथूरिया आदि ने  अभीनय किया मंच पर सेवा करने वाले जगन्नाथ अरोरा संजय छाबड़ा राजू क्वात्रा  राजू  बडज़ात्या देवेंद्र अरोरा अशोक अरोरा महेंद्र जुनेजा, मीडिया प्रभारी राजू पंडित आदि उपस्थित थे।