'पिता फोड़ते थे चने, बेटा खेलने लगा हजारों करोड़ मेंÓ

Feb 19 2020

ग्वालियर। ग्वालियर में एमसीएक्स का जाल फैला कर कई परिवारों को कंगाल करने वाले एमसीएक्स कारोबारी मोनू गुप्ता डबरा उर्फ रीतेश गुप्ता और बृजेश श्रीवास्तव दतिया के बही खाते टटोलते-टटोलते आयकर वालों को मंगलवार दोपहर से बुधवार सुबह हो गई है पर वे अभी तक इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं कि आखिरकार इन दोनों ने मिलकर सरकारी खजाने को चूना कितने करोड़ रुपए का लगाया है। मंगलवार की दोपहर शुरु हुई कार्रवाई बुधवार की सुबह भी जारी रही और आयकर विभाग वाले खुद हैरान हैं कि डबरा और दतिया जैसे छोटे कस्बे से ग्वालियर आकर यह दोनों एमसीएक्स के कारोबार में किस तरह घुसे हुए थे और नंबर दो का काम करते हुए व्यापारियों को आर्थिक चपत लगाने के साथ-साथ सरकार को भी राजस्व का भी नुकसान पहुंचा रहे थे। यदि सरकार के जरिए सोना बैंक से खरीदो तो उस पर प्रति किलो लगभग साठ हजार सरकार को देना होता है पर एमसीएक्स में ऐसा कुछ नहीं है। रोजाना भाव खुलता और रोजाना नफा-नुकसान बुक होता था। जितनी एंट्री यह लोग कंप्यूटर में दर्ज करते थे वह नंबर एक की होती थीं, यानी उस पर टैक्स लगता था और जो एंट्री कंप्यूटर पर दर्ज नहीं होती थीं वे नंबर दो की होती थीं। यह लोग अधिकांश कारोबार नंबर दो में ही करते थे और सराफा बाजार के कारोबारी सोना बुक करवाने के बाद इन तक झोला-झोला भरकर नोट पहुंचाते थे कि कहीं उनका सोना भाव बढऩे की सूरत में कट ना जाए। बस इसी कारोबार में यह दोनों देखते ही देखते हजारों करोड़ का कारोबार करने लगे और ग्वालियर से बाहर दिल्ली-मुंबई में भी इनके द तर खुल गए। एक दिन में यह लोग दस से पंद्रह किलो तक सोना नंबर दो में यहां वहां कर देते थे। बता दें पिछले छह माह में सोने के भाव में काफी तेजी आई है और इसका असर यह था कि इनके यहां सोना बुक करवाने वाले कारोबारी इनके पास सिर्फ नोट ही पहुंचाते रहे, मुनाफा कोई नहीं कमा पाया।  
15 साल में हजारों करोड़
देश में एमसीएक्स का कारोबार साल 2004-05 में शुरु हुआ। देखते ही देखते यह कारोबार देश भर में फैला और ग्वालियर भी इससे अछूता नहीं रहा। बस इसी कारोबार में मोनू गुप्ता और बृजेंद्र श्रीवास्तव ने दिमाग लगाया और पिता के कारोबार से हटकर कुछ करने की सोची। मोनू के पिता महेश गुप्ता हलवाई हैं तो बृजेद्र श्रीवास्तव के घर में चना फोडऩे का काम होता था। पटाखे भी इनके घर में बनाए जाते थे। इन दोनों ने ग्वालियर में आकर जो पांव जमाए ग्वालियर के कई क्या सैकड़ों लोगों एमसीएक्स जिसे कारोबारी भाषा में डब्बा कारोबार भी कहते हैं में कई लोग इनके जरिए कूद पड़े। लोगों को एमसीएक्स के जरिए सोना खरीदना इन दोनों ने सिखाया और लोगों को इस कारोबार का चस्का ऐसा लगवाया कि सैकड़ों परिवारों के घर बिक गए और ग्वालियर के कई सराफा कारोबारी आज भी इनके नाम पर सिर पकड़कर रोते नजर आते हैं।