ईकोग्रीन कंपनी के कर्मचारियों ने की हड़ताल, नहीं उठा कचरा

Feb 18 2020

ग्वालियर। चीन की कंपनी ईकोग्रीन को जबसे शहर की सफाई व्यवस्था में लगाया गया है, हर कुछ दिन बाद इनके द्वारा हड़ताल कर दी जाती है, ऐसे में खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ता है, इसके बावजूद भी निगम के अधिकारियों के हित जुड़े होने के कारण कंपनी के खिलाफ एक्शन नहीं लिया जाता। आज मंगलवार को फिर इस कंपनी के पांच में से तीन सैकड़ा से अधिक कर्मचारियों ने ओवर टाइम का पैसा न मिलने के कारण हड़ताल कर दी, जिसके चलते शहर के अधिकांश क्षेत्रों में न तो सीटी बजी न ही कचरा उठा। यदि यह हड़ताल लंबी खिंचती है तो फिर हालात और बिगड़ सकते हैं। 
शहर में सफाई व्यवस्था के लिए ईकोग्रीन कंपनी को ठेका दिया गया है, जिसे हर माह लाखों रुपए का भुगतान नगर निगम द्वारा किया जाता है, इसके बावजूद भी यह हड़ताल कर देते हैं और निगम के जि मेदार अधिकारी इनसे जवाब तलब तक नहीं करते। हाल ही में कंपनी को लाखों रुपए का भुगतान हुआ है, लेकिन कंपनी ने कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं बांटा, वहीं अधिकांश कर्मचारियों को रविवार के रोज कराए गए ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं किया, जिससे पहले तो इनके द्वरा सोमवार को चतावनी दी गई, लेकिन जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो फिर वह मंगलवार को काम बंद कर घर बैठ गए। ईकोग्रीन द्वारा शहर की सफाई में कुल 500 कर्मचारी लगा रखे हैं, इनमें से आधे ड्राइवर व आधे सफाईकर्मी हैं। इनमें से साढ़े तीन सौ कर्मचारी मंगलवार को काम पर नहीं पहुंचे।
ईकोग्रीन के कर्मचारियों की हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद शहर का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आया और स्थायी कर्मचारी और निगम के सफाई अमले को डबल काम पर लगाया गया है, जिनके भोजन की भी व्यवस्था निगम ने की है, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं और शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं। सुबह वाले स्थायी कर्मचारी झाड़ू तो लगा गए, लेकिन कचरा समेटने कोई नहीं पहुंचा।
इधर मप्र नगर निगम, नगर पालिका कर्मचाकी संघ ने कहा है कि सफाई कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। दो माह से वेतन नहीं मिला है, वहीं आउटसोर्स कर्मचारियों को चार माह से वेतन नहीं मिला है। यदि वेतन नहीं मिला को एक मात्र रास्ता हड़ताल का बचेगा। मांग करने वालों में जिलाध्यक्ष बबलू भेरूआ, पूरन डोगयाले, रमेश भैरूआ, बबलू भैरूआ व पुरुषोत्तम आदि ने कहा है इन्हे शीघ्र वेतन दिया जाए।