डॉ. मन्जुलता आर्य ने किया तथा अन्त में आभार प्रदर्शन अनंगपाल सिंह भदौरिया ने किया।

Feb 08 2020

पाठक मंच ठाठीपुर में हुई दो पुस्तकों की समीक्षा
ग्वालियर। गत दिवस  मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद भोपाल से सम्बद्ध पाठक मंच थाठीपुर ग्वालियर द्वारा विवेकानंद पुनर्वास केन्द्र थाठीपुर ग्वालियर में कवयित्री संध्या सिंह द्वारा रचित काव्य कृति "मौन की झनकार", तथा  "उनींदे द्वार पर दस्तक" पर समीक्षात्मक चर्चा की गई।

       कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश तोमर  ने की।  मुख्य अतिथि के रूप में हरिओम गौतम,  सारस्वत अतिथि राजकिशोर वाजपेयी, विशिष्ट अतिथि बी.एल.धाकड़ व नीलम गुप्त उपस्थित रहीं ।   प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण पूजार्चना की। डाॅ0 अनिल उपाध्याय ने  सरस्वती  गीत प्रस्तुत किया।  इसके पूर्व सभी सदस्यों द्वारा प्रतिमाह की भाॅति  वृक्षारोपण किया गया।    तत्पश्चात पुस्तक  "उनींदे द्वार  पर पुस्तक" पर समीक्षा करते  हुए लालता प्रसाद दोहरे ने कहा कि   "यह प्राकृतिक आध्यात्मिक ग्रन्थ है। "        रामचरण चिडार  ने कहा कि "पुस्तक बहुत ही प्रेरणादायी है।कवयित्री ने कविताओं द्वारा सामाजिक मूल्यों की प्रतिष्ठा का सार्थक प्रयास किया है।
       उत्कृष्ट कुलश्रेष्ठ ने समीक्षा करते हुए कहा कि इसमें विचार सहज रूप में व्यक्त हैं। आम आदमी की पीड़ा को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।     डॉ0  अनिल उपाध्याय  ने पुस्तक समीक्षा करते हुए कहा कि व्यक्ति का मानवीय संवेदनाओं से जुड़ना ही कविता है।यह कृति इस कसौटी पर खरी उतरती है।"
       इसी क्रम  में  मुख्य अतिथि हरिओम गौतम ने कहा कि  "सच्चा साहित्य समाज का दर्पण है।  और ये कृतियाँ आईना दिखाने में सक्षम है।"       सारस्वत अतिथि राजकिशोर वाजपेयी ने कहा कि "ये कृतियाँ काल बोध को साथ लेकर चलती हैं। "        विशिष्ट अतिथि बी.एल.धाकड़ ने कहा कि "हमें नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। "
       नीलम गुप्ता ने कहा कि पाठक मंच के माध्यम से साहित्य को गति मिल रही है। "
      अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश तोमर ने कहा कि "कवयित्री अपार संभावनाओं को समेटे हुए ।"
       इसके पश्चात काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।   "एक लम्बे समय से रह रहा हूँ इस कक्ष में,    इसने मुझे संभाला है माॅ के वक्ष सा।"   "आरजू बनकर महफिल में न बैठा कीजिए।     तमन्नाओं का तसब्बुर गवां होता। " "गुनगुनाओ तुम मुझे अपनी तरह।मैं तुम्हारे प्यार का पहला चरण हूँ।   "तमन्ना जो कहना कह डालो    मैं तो अब बहन रहूँगी। "

   "सड़ी गली सर्दी ठिठुरने का सुखद अंत हूँकि     मैं वसंत हूँ। "
राजकिशोर वाजपेयी:-   "पग पग रोटी, डग डग नीर, ऐसा जिसका रहा जमीर    जौहर की ज्वाला से हारी, यहाँ वासना की तस्वीर। "  इस अवसर पर डॉ0  मीना श्रीवास्तव, नीलम गुप्ता, जगदीश गुप्त,   किंकरपाल सिंह, अवधेश कुमार शाक्य, कप्तान सिंह कुशवाह, डाॅ0 रविन्द्र नाथ मिश्र,  सुधीर वसंत, रामलाल साह व ऊषा वर्मा आदि साहित्यकार  सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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